Hepatitis B Causes Liver Infection: लिवर से संबंधित समस्याओं के मामले सभी उम्र के लोगों में देखे जा रहे हैं, इससे बचाव को लेकर सावधान रहना आवश्यक है। दुनियाभर में लिवर संक्रमण के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। हेपेटाइटिस-बी को इसके लिए प्रमुख माना जाता है।
Liver Disease: लिवर संक्रमण हो सकता है जानलेवा, आप इससे कैसे बचें, यहां जानिए सबकुछ
- लिवर संक्रमण के मामलों में दुनियाभर में तेजी से वृद्धि हुई है। हेपेटाइटिस-बी को इसके लिए प्रमुख माना जाता है।
- ज्यादातर मामलों में हेपेटाइटिस-बी कुछ समय में ठीक हो जाता है पर कुछ स्थितियों में इसका असर 6 माह या उससे भी अधिक समय तक बना रह सकता है।
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हेपेटाइटिस-बी का खतरा
हेपेटाइटिस-बी, लिवर में होने वाले संक्रमण का कारण बनती है, जिसके लिए हेपेटाइटिस बी वायरस (एचबीवी) को कारक माना जाता है। क्रोनिक हेपेटाइटिस-बी में लिवर फेल होने, लिवर कैंसर या सिरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि देखा गया है कि हेपेटाइटिस-बी वाले अधिकांश वयस्क पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं, भले ही उनके लक्षण गंभीर हों।
शिशुओं और बच्चों में इसके गंभीर रूप लेने का खतरा जरूर बढ़ जाता है।
हेपेटाइटिस-बी संक्रमण क्यों होता है?
हेपेटाइटिस-बी संक्रमण के लिए एचबीवी वायरस को प्रमुख कारण माना जाता है। यह वायरस रक्त, वीर्य या शरीर के अन्य तरल पदार्थों के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अन्य श्वसन संक्रमण की भांति इसके छींकने या खांसने से फैलने का खतरा नहीं होता है।
- स्वास्थ्य देखभाल कर्मचारियों और मानव रक्त के संपर्क में आने वाले लोगों में इसके संक्रमण का खतरा अधिक देखा गया है।
- गर्भवती से उसके बच्चे को भी यह संक्रमण हो सकता है।
हेपेटाइटिस-बी संक्रमण की पहचान कैसे की जाए?
हेपेटाइटिस-बी के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक होते हैं। संक्रमण के एक से चार महीने बाद इसके संकेत नजर आते हैं, कुछ लोगों में यह दो सप्ताह बाद ही देख जा सकते हैं। इसके लक्षणों की समय रहते पहचान बहुत आवश्यक है। इसमें से तीन-चार लक्षणों के अनुभव होने पर डॉक्टर की सलाह पर जांच जरूर कराएं।
- पेट में दर्द और बुखार
- त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया), बार-बार यह दिक्कत होते रहना।
- पेशाब का रंग गहरा होना।
- जोड़ों का दर्द।
- भूख में कमी।
- कमजोरी और थकान
हेपेटाइटिस-बी से बचाव के लिए क्या करें?
हेपेटाइटिस-बी संक्रमण से बचे रहने के लिए टीकाकरण एक उपाय हो सकता है। 19 से 59 वर्ष की आयु लोगों को लिए टीके उपलब्ध हैं। इसके अलावा इस संक्रमण से बचाव के लिए सुरक्षित संभोग करने और प्रतिबंधित दवाइयों का सेवन न करने की सलाह दी जाती है। टैटू बनवाने वाले लोगों में भी इसका खतरा अधिक देखा गया है, इसलिए सुरक्षित स्थानों से ही टैटू बनवाना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।