क्या आपको कभी ऐसा लगा है कि आप कुछ सोच नहीं पा रहे, याददाश्त कमजोर हो गई है या फोकस करना मुश्किल हो रहा है? अगर हां, तो इस तरह की समस्याओं को हल्के में लेने की गलती न करें। कई बार ये ब्रेन फॉग की समस्या का संकेत हो सकता है।
Brain Fog: क्या है ब्रेन फॉग की समस्या? ऐसे लक्षण हैं तो तुरंत जाइए डॉक्टर के पास
- ब्रेन फॉग दो शब्दों- ब्रेन और फॉग से मिलकर बना है। ब्रेन का मतलब मस्तिष्क और फॉग का मतलब कोहरा।
- जिस तरह से कोहरा में कुछ भी देख पाना स्पष्ट नहीं होता है, उसी तरह से ब्रेन फॉग की स्थिति में आपकी सोच-याददाश्त बहुत स्पष्ट नहीं होती है।
कोविड-19 के बाद बढ़ गए हैं ब्रेन फॉग के मामले
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की एक रिपोर्ट के अनुसार ब्रेन फॉग के लिए न्यूरोइंफ्लेमेशन और हार्मोनल असंतुलन जैसी स्थितियां जिम्मेदार हो सकती हैं।
इसी से संबंधित लैंसेंट न्यूरोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, कोविड-19 के बाद 30% मरीजों में ब्रेन फॉग की दिक्कत बढ़ गई है। ये समस्या कुछ हफ्तों से लेकर महीनों तक भी बनी रह सकती है।
ब्रेन फॉग कोई गंभीर बीमारी नहीं, लेकिन यह आपकी क्वालिटी ऑफ लाइफ, कामकाजी क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। इसकी पहचान समय रहते हो जाए, तो यह पूरी तरह से ठीक हो सकती है।
ब्रेन फॉग के कारण क्या-क्या दिक्कतें होती हैं?
ब्रेन फॉग के कारण कई प्रकार की दिक्कतों का अनुभव हो सकता है जिसकी समय रहते पहचान जरूरी है।
- ब्रेन फॉग के कारण ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, याद्दाश्त में कमजोरी (छोटी-छोटी बातें भूल जाना), निर्णय लेने में मुश्किल, चिड़चिड़ापन, नींद आने में दिक्कत जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
ये दिक्कत होती क्यों है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ब्रेन फॉग कई प्रकार के शारीरिक, मानसिक और लाइफस्टाइल कारणों से हो सकता है। अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों की नींद पूरी नहीं होती है उन्हें इस तरह की समस्याओं का खतरा अधिक हो सकता है। हार्वर्ड के विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आप अक्सर रात में 6 घंटे से कम की नींद लेते हैं तो इसके कारण ब्रेन फॉग होने का जोखिम हो सकता है।
- अमेरिकन साइकोलॉजी एसोसिएशन के अनुसार क्रॉनिक स्ट्रेस की समस्या ब्रेन के कॉग्निटिव फंक्शन को प्रभावित कर सकती है जिसके कारण ब्रेन फॉग का खतरा रहता है।
- हार्मोनल बदलाव, खासकर महिलाओं में प्रेगनेंसी, मेनोपॉज या थायराइड असंतुलन के दौरान ब्रेन फॉग ज्यादा देखने को मिलता है।
- विटामिन बी12, विटामिन डी, आयरन और ओमेगा-3 जैसे पोषक तत्वों की कमी के कारण भी मस्तिष्क की ये समस्या बढ़ सकती है।
ब्रेन फॉग से बचाव के लिए क्या करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, आप ब्रेन फॉग को होने से पूरी तरह से नहीं रोक सकते, लेकिन मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए कुछ प्रयासों की मदद से इसके जोखिमों को कम कर सकते हैं।
अध्ययनों से पता चलता है कि चूंकि कोविड-19 संक्रमण के बाद ब्रेन फॉग होने का खतरा अधिक देखा गया है इसलिए कोविड-19 वैक्सीन लगवाना आपके लिए मददगार हो सकता है।
- 7–8 घंटे की क्वालिटी नींद सभी वयस्कों के लिए जरूरी है, ये ब्रेन फॉग के खतरे को कम करने में सहायक हो सकता है।
- डॉक्टर्स सभी उम्र के लोगों को डिजिटल डिटॉक्स करें (स्क्रीन टाइम कम करने) की सलाह देते हैं।
- ओमेगा-3, विटामिन बी12 और आयरन युक्त डाइट लें।
- योग, ध्यान और प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करें।
- नियमित व्यायाम करें, रोज 30 मिनट वॉक या स्ट्रेचिंग आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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