शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए सभी लोगों को पर्याप्त मात्रा में स्वस्थ और पौष्टिक आहार के सेवन की सलाह दी जाती है। असल में इसके पीछे का उद्देश्य शरीर को प्रोटीन, विटामिन और आवश्यक खनिज की पूर्ति करना होता है। शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण कई प्रकार के गंभीर रोगों का खतरा हो जाता है, शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाना भी उन्हीं में से एक है। हीमोग्लोबिन, लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक प्रकार का प्रोटीन है, जिसके कमी के कारण शरीर में खून की मात्रा घट जाती है। इस स्थिति में एनीमिया रोग होने का खतरा हो सकता है, कई स्थितियों में एनीमिया जानलेवा भी हो सकती है।
सावधान: हीमोग्लोबिन की कमी के कारण हो सकती हैं गंभीर बीमारियां, जानिए कैसे पाएं इससे निजात?
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हीमोग्लोबिन की कमी बन सकती है गंभीर समस्याओं का कारण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक हीमोग्लोबिन की कमी के कारण एनीमिया का खतरा हो सकता है। यदि परीक्षण में हीमोग्लोबिन की मात्रा पुरुषों में 13.5 ग्राम/ डीएल और महिलाओं में 12 ग्राम/ डीएल से कम आती है तो इस स्थिति को एनीमिया माना जाता है। एनीमिया कई अन्य स्थितियों के कारण भी हो सकती है, जैसे कि किडनी की बीमारी और कैंसर के लिए की गई कीमोथेरेपी (जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकती है) आदि।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को इसके प्रारंभिक लक्षणों के आधार पर पहचाना जा सकता है। समस्या का अगर जल्दी निदान हो जाए तो रोग को गंभीर होने से रोका जा सकता है। यदि आपमें लंबे समय से यह समस्याएं बनी हुई हैं तो सावधान हो जाएं।
- कमजोरी या थकान।
- सास लेने में दिक्कत।
- सिर चकराना
- तेज़ या अनियमित दिल की धड़कन
- सिरदर्द, हाथ और पैर का ठंडा होना।
- त्वचा में पीलेपन की समस्या।
- छाती में दर्द।
हीमोग्लोबिन की कमी को कैसे दूर करें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को आसानी से दूर किया जा सकता है। इसके लिए सभी लोगों को आहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए। आहार में आयरन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे कि मांस, गहरे हरे पत्ते वाली सब्जियां, सूखे मेवे और नट्स को जरूर शामिल करना चाहिए। मांस और डेयरी उत्पाद विटामिन-बी12 के अच्छे स्रोत हैं वहीं फोलिक एसिड के लिए खट्टे फलों के रस, फलियां और अनाज का सेवन किया जा सकता है। यह सभी शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाने में सहायक माने जाते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वृद्ध लोग या पौष्टिक आहार विशेषकर आयरन की पूर्ति न करने वाले लोगों में हीमोग्लोबिन की कमी होने का खतरा रहता है। इसके अलवा क्रोनिक स्वास्थ्य स्थितियां जैसे कि ऑटोइम्यून बीमारी, यकृत रोग, थायरॉयड रोग आदि के शिकार लोगों में भी हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो सकता है। इस समस्या से बचे रहने के लिए पौष्टिक आहार लेते रहें साथ ही धूम्रपान से दूरी बना लें। खूब पानी पीने भी हीमोग्लोबिन के स्तर को बेहतर रखने में मदद मिल सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला के हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।