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काम की बात: दोपहर में नींद की झपकी के इन फायदों से आप भी होंगे अनजान, यहां जानिए विस्तार से
Mon, 27 Sep 2021 05:53 PM IST
Abhilash Srivastava
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Abhilash Srivastava
Updated Mon, 27 Sep 2021 05:53 PM IST
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दोपहर में नींद की झपकी के फायदे
- फोटो : iStock
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दोपहर में नींद की झपकी के बारे में सुनते ही 'थ्री इडियट्स' फ़िल्म के प्रोफेसर सहस्त्रबुद्धे जरूर याद आए होंगे। रोज दोपहर में वो ठीक 7.5 मिनिट्स की झपकी लिया करते थे। हालांकि यह पात्र कुछ मनोरंजन और कुछ सार्थक सन्देश देने वाला था लेकिन असल जिंदगी में भी ऐसा करने वाले कई लोग होते हैं। आपने अक्सर लोगों से सुना होगा कि दिन की झपकी लिए बिना उन्हें आराम नहीं मिलता। इस कैटेगरी में अधिकांशतः घर पर रहने वाली महिलाएं, पुरुष और बच्चे या बुजुर्ग आते हैं। इस झपकी की अवधि हर व्यक्ति के हिसाब से अलग हो सकती है लेकिन अमूमन झपकी को आधा घण्टे से 2 घण्टे का मान लिया जाता है। कई लोगों को तो इससे इतनी रिलीफ और एनर्जी मिलती है कि वे किसी दिन अगर इस झपकी को मिस कर दें तो बीमार महसूस करने लगते हैं। कुछ लोगों के लिए यह सुबह जल्दी उठने पर होने वाली नींद की पूर्ति होती है। तो क्या वाकई ये 'जादू की झप्पी', इतनी असरदार होती है?
दोपहर में सोने के क्या फायदे हैं?
- फोटो : Pixabay
दोपहर में नींद की फायदे
कुछ लोगों के लिए दोपहर में छोटी से नींद भी काफी सुकून देने वाली होती है। इससे आपको कई लाभ भी मिल सकते हैं।
कुछ लोगों के लिए दोपहर में छोटी से नींद भी काफी सुकून देने वाली होती है। इससे आपको कई लाभ भी मिल सकते हैं।
- केवल शरीर ही नहीं, छोटी सी ये झपकी दिमाग को भी आराम पहुंचाती है। दिन की करीब 1 घण्टे की झपकी पूरे शरीर की मसल्स को रिलैक्स होने का मौका देती है। यही कारण है कि इस झपकी के साथ शरीर और दिमाग को आराम मिल जाता है और उठकर आप तरोताजा महसूस करते हैं।
- कई बार ऐसा होता है कि यात्रा के बाद या रात को किसी पार्टी से लेट घर आने के बाद आपकी नींद में व्यवधान पड़ता है। इस समय दोपहर की झपकी आपकी थकान को मिटाने का काम कर सकती है। जिन लोगों को दिन में झपकी लेने की आदत होती है, खासकर घरेलू महिलाएं, उनके पीछे एक बड़ी वजह होती है सुबह जल्दी उठकर घर भर का काम सम्भालना और देर रात तक काम में लगे रहना। इसी वजह से जब वे दिन की झपकी के बाद उठती हैं तो थकान दूर हो चुकी होती है।
- जिन लोगों का रूटीन एकदम घड़ी के हिसाब से चलता है। जैसे कि सुबह जल्दी उठकर काम पर जाने वाले लोग या सुबह जल्दी उठकर स्कूल जाने वाले बच्चे, उनमें दोपहर की झपकी अलर्टनेस बढ़ाने का काम भी करती है।
- ऐसे कई लोग होते हैं जिन्हें पर्याप्त नींद न मिलने पर चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग, व्यवहार में बदलाव जैसी समस्याएं होती हैं। अगर वे लोग दिन में झपकी ले लें तो उनका मूड अच्छा हो जाता है। यह ठीक वैसा ही है जैसे कई लोगों में चाय न मिलने के कारण होने वाला सिरदर्द होता है।
- नींद का यह छोटा सा टुकड़ा याददाश्त पर भी अच्छा असर डालता है। इसके अलावा त्वरित निर्णय क्षमता और हर काम को करने की क्षमता पर भी यह अच्छा प्रभाव डालती है। इसलिए ही दोपहर की झपकी का असर बच्चों पर बहुत अच्छा देखा जा सकता है। खासकर वे बच्चे जो सुबह जल्दी उठकर स्कूल जाते हैं।
दोपहर की झपकी
- फोटो : Pixabay
क्या सभी के लिए जरूरी है दोपहर की नींद?
हमारी देसी पद्धति में दिन की नींद को हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं माना जाता। इसलिए पुराने वैद्य कहा करते थे कि दिन में सिर्फ बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं या बीमार लोगों को ही सोना या आराम करना चाहिए। लेकिन अब लाइफस्टाइल में आये परिवर्तनों ने दिन की इस झपकी को कई लोगों के लिए जरूरी बना डाला है। तो अगर आपको झपकी लेना ही हो तो इन बातों का ख्याल जरूर रखें-
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अस्वीकरण: अमर उजाला के हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
हमारी देसी पद्धति में दिन की नींद को हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं माना जाता। इसलिए पुराने वैद्य कहा करते थे कि दिन में सिर्फ बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं या बीमार लोगों को ही सोना या आराम करना चाहिए। लेकिन अब लाइफस्टाइल में आये परिवर्तनों ने दिन की इस झपकी को कई लोगों के लिए जरूरी बना डाला है। तो अगर आपको झपकी लेना ही हो तो इन बातों का ख्याल जरूर रखें-
- आधा-एक घण्टे से ज्यादा देर की झपकी न लें। इससे ज्यादा देर सोने से आपके शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक पर गलत असर पड़ेगा। यह याद रखें कि प्राकृतिक हिसाब से नींद के लिए रात ही बनी है। इसलिए कोशिश करें कि रात को ही भरपूर नींद लें।
- दोपहर में 3 बजे के बाद न सोएं। यह बात बच्चों पर भी लागू होती है। अगर आपका बच्चा स्कूल से 3 बजे के बाद घर लौटता है तो उसे रात में जल्दी सोने की आदत डालें, बजाय दिन में सुलाने के। दिन में 3 बजे के बाद सोने से आपकी रात की नींद में व्यवधान आ सकता है।
- जब भी झपकी लें, आपके आस पास का माहौल शांत और आरामदायक होना चाहिए। ताकि आप एकदम सुकून के साथ झपकी पूरी कर सकें। इससे आपके दिमाग को पूरा आराम मिलेगा और उठने पर आप तरोताजा महसूस करेंगे।
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अस्वीकरण: अमर उजाला के हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।