रीमा की मम्मी अक्सर बारिश होने से पहले से ही बता देती हैं कि कब बारिश होगी। घर में सबने उनका नाम मौसम विभाग रख दिया है। हालांकि ये कुछ पलों के लिए हंसी-मजाक की बात लगती है लेकिन इसके पीछे असल में विज्ञान भी है और तकलीफ भी। मौसम में बदलाव के साथ ही कुछ लोगों के जोड़ों में तकलीफ बढ़ने लगती है और लगातार ऐसा होने से वे समझ जाते हैं कि अब मौसम बदलेगा। यही रीमा की मम्मी के साथ भी होता है।
जोड़ों के दर्द से हैं परेशान, तो ये उपाय कर सकते हैं आपकी मदद
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दर्द का उभरना
- हवा के दबाव में परिवर्तन से घने काले बादलों के छाते ही कई लोगों के घुटनों, कलाइयों, कमर, पैरों के निचले हिस्से और यहां तक कि उंगलियों और पसलियों में भी दर्द और अकड़न होने लगती है। यह दर्द कई बार सुबह उठने पर परेशान करता है कई बार रात को सोते समय। कई लोगों में दिनभर काम करते रहने पर दर्द नहीं उभरता लेकिन जैसे ही वे एक जगह बैठते हैं उनका दर्द बढ़ने लगता है।
तो क्या करें उपाय?
उम्र बढ़ने के साथ आपकी हड्डियों की आयु भी बढ़ती है। यानी उनकी क्षमता में कमी आती है। इसलिए हड्डियों की मजबूती चाहिए, लम्बे समय तक उनकी दुरुस्ती चाहिए और जोड़ों के दर्द में कमी चाहिए तो इन बातों का ध्यान रखें:-
* बारिश और ठंडक के कारण लोगों का चलना फिरना कम होता है। यह भी जोड़ों के दर्द का कारण बन सकता है। इसलिए बारिश में भी पैदल चलने, स्ट्रेचिंग, ब्रिस्क वॉक या योगा जरूर करें। चाहे घर में ही एक कमरे से दूसरे कमरे में चलें पर कम से कम आधा घण्टे सुबह और आधा घन्टा रात के भोजन के बाद वॉक करें।
* मौसम में ठंडक बढ़ते ही जितना हो सके खुद को गर्म रखने की कोशिश करें। अगर दिक्कत न हो तो पैरों में मोजे पहनें या कम से कम चप्पल पहन कर रहें। पूरी बांहों के कपड़े पहनें। रात को भी पैरों पर मोटी चादर डालकर सोएं। गर्म सेक करें।
* अपने वजन को संतुलित रखें। भोजन में गरिष्ठ चीजें और अधिक मीठा लेने से बचें। कोशिश करें कि रात का भोजन जल्दी करें और भोजन करने के बाद टहलें जरूर।
* भरपूर नींद लें और सुबह उठने के बाद कम से कम आधा घन्टा (सुबह 8-10 बजे तक) धूप में गुजारें।
नोट: डॉक्टर अरविंद रावल कंसल्टेंट ऑर्थोपीडिक सर्जन हैं और वे मेदांता सुपरस्पेशिलिटी हॉस्पिटल में कार्यरत हैं।
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