Doctor Advice Mental Health: मानसिक स्वास्थ्य आज के समय की एक बड़ी चुनौती बन गया है, लेकिन अक्सर लोग अवसाद या डिप्रेशन को केवल 'दुख' समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। वास्तव में डिप्रेशन सिर्फ मन की उदासी नहीं है, बल्कि यह शरीर में होने वाले रासायनिक परिवर्तनों का परिणाम है।
Health Tips: बेहद साधारण होते हैं अवसाद के शुरुआती लक्षण, नजरअंदाज करने पर बन सकते हैं मेंटल हेल्थ के मरीज
Early Symptoms Of Depression And Remedies: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बहुत से लोग अवसाद से जूझ रहे हैं, लेकिन उनमें से कम लोगों को ही इसके बारे में मालूम है और वो इसका इलाज कराते हैं। इसलिए आइए इस लेख में डॉक्टर से डिप्रेशन के शुरुआती लक्षणों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
रूचि का अभाव और नकारात्मक विचार
डॉ. सोलंकी के अनुसार पहला लक्षण है अपनी पसंदीदा चीजों जैसे संगीत, पेंटिंग या हॉबीज में रुचि खो देना। यह आलस नहीं बल्कि 'इमोशनल शटडाउन' का संकेत है। इसके साथ ही व्यक्ति 'निगेटिव सेल्फ टॉक' करने लगता है, जहां वह खुद को हर गलती के लिए जिम्मेदार मानता है और गिल्टी महसूस करता है। खुद को बेकार समझना और लोगों से दूरी बनाना इस मानसिक स्थिति को और गंभीर कर देता है।
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ऊर्जा की कमी और बिगड़ा हुआ स्लीप पैटर्न
बिना किसी शारीरिक श्रम के भी लगातार थकान और कम ऊर्जा महसूस होना अवसाद का एक बड़ा शारीरिक लक्षण है। इसके अलावा, नींद का पैटर्न पूरी तरह बिगड़ जाता है, व्यक्ति या तो दिनभर सोता रहता है या उसे रात भर नींद नहीं आती। जब मस्तिष्क को शांति नहीं मिलती, तो शरीर भी रिकवर नहीं हो पाता, जिससे चिड़चिड़ापन और मानसिक भारीपन बढ़ता चला जाता है।
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बचाव का पहला कदम
अवसाद के चक्र को तोड़ने के लिए डॉ. शालिनी सिंह सोलंकी व्यायाम करने की सलाह देती हैं। शारीरिक गतिविधि से शरीर में 'एंडोर्फिन' और अन्य खुश रहने वाले हार्मोन्स का स्राव बढ़ता है, जो मूड को नेचुरल रूप से सुधारते हैं। नियमित वर्कआउट न केवल शरीर को सक्रिय रखता है, बल्कि मस्तिष्क को नकारात्मक विचारों के जाल से बाहर निकालने में भी मदद करता है।
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अकेलेपन से बचने के लिए सामाजिक मेलजोल बढ़ाना और अपनी पसंदीदा हॉबीज को समय देना अनिवार्य है। दोस्तों और परिवार के साथ बात करने से मन का बोझ हल्का होता है और सकारात्मकता बढ़ती है। डॉक्टर का कहना है कि खुद को सुरक्षित महसूस कराने के लिए लोगों से दूर भागने के बजाय, उनसे जुड़ना ही इस बीमारी का सबसे बड़ा उपचार है। अगर लक्षण बने रहें तो विशेषज्ञ से सलाह लेने में संकोच न करें।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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