MRI स्कैन कराने जा रहे हैं तो गलती से भी न पहनें ये सामान, जा सकती है आपकी जान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
MRI का मतलब है मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग स्कैन, जिसमें आम तौर पर 15 से 90 मिनट तक लगते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर का कौन सा, कितना बड़ा हिस्सा स्कैन किया जाना है। कितनी तस्वीरें ली जानी हैं। यह रेडिएशन के बजाए मैग्नेटिक फील्ड पर काम करता है। इसलिए एक्स रे और सीटी स्कैन से अलग है। रेडियोलॉजिस्ट डॉ संदीप ने बताया, "पूरे शरीर में जहां जहां हाइड्रोजन होता है, उसके स्पिन यानी घूमने से एक इमेज बनती है।" शरीर में 70 फीसदी पानी होता है, इसलिए हाइड्रोजन स्पिन के जरिए बने इमेज से शरीर की काफी दिक्कतों का पता लगाया जा सकता है। दिमाग, घुटने, रीढ़ की हड्डी जैसे शरीर के अलग अलग हिस्सों में जहां कहीं भी सॉफ्ट टिशू होती है उनका अगर एमआरआई स्कैन होता है तो हाइड्रोजन स्पिन से इमेज बनने के बाद यह पता लगाया जाता है कि शरीर के उन हिस्सों में कोई दिक्कत तो नहीं है।
आम तौर पर MRI स्कैन वाले दिन आप खा-पी सकते हैं और दवाएं भी ले सकते हैं। कुछ मामलों में स्कैन से चार घंटे पहले तक ही खाने को कहा जाता है ताकि चार घंटों की फास्टिंग हो सके। कुछ लोगों को अत्यधिक पानी भी पीने को कहा जाता है। अस्पताल पहुंचने पर जिसका स्कैन होना है, उसकी सेहत और मेडिकल जानकारी मांगी जाती है जिससे मेडिकल स्टाफ को यह पता चलता है कि स्कैन करना सुरक्षित है या नहीं। यह जानकारी देने के बाद मंजूरी भी मांगी जाती है कि आपका स्कैन किया जाए या नहीं क्योंकि MRI स्कैनर ताकतवर मैग्नेटिक फील्ड पैदा करता है।
ऐसे में अंदर जाते वक्त शरीर पर कोई मेटल ऑब्जेक्ट नहीं होना चाहिए। इनमें यह चीजें शामिल हैं:
-घड़ी
-ज्वेलरी जैसी नेकलेस या झुमके
-नकली दांत जिनमें धातु का इस्तेमाल होता है
-सुनने की मशीन
-विग, क्योंकि कुछ में धातु के टुकड़े होते हैं
MRI स्कैनर एक सिलेंडरनुमा मशीन होती है जो दोनों तरफ से खुली होती है। जांच कराने वाला व्यक्ति मोटराइज्ड बेड पर लेटता है और फिर वह भीतर जाता है। कुछ मामलों में शरीर के किसी खास हिस्से पर फ्रेम रखा जाता है जैसे कि सिर या छाती। फ्रेम में ऐसे रिसीवर होते हैं जो स्कैन के दौरान शरीर की तरफ से जाने वाले सिग्नल लपकते हैं जिससे बढ़िया गुणवत्ता वाली तस्वीरें लेने में मदद मिलती है। स्कैन के दौरान कई बार तेज आवाजें आती हैं जो इलक्ट्रिक करंट की होती है। शोर से बचने के लिए हेडफोन भी दिए जाते हैं।
शरीर की जांच के लिए बनी ये मशीन कई बार खतरनाक और जानलेवा भी साबित हो सकती है। यूं तो रूम में दाखिल होने से पहले यह सुनिश्चित किया जाता है कि मरीज के पास कोई धातु की चीज ना हो लेकिन कई बार अनजाने में गड़बड़ी हो जाती है। अगर शरीर के भीतर कोई स्क्रू, शार्पनेल या कारतूस के हिस्से भी हैं तो खतरनाक साबित हो सकते हैं। धातु के ये टुकड़े मैग्नेट बेहद तेज गति से खींचेंगे और शरीर को गंभीर चोट पहुंचेगी। इसके अलावा मेडिकेशन पैच, खासतौर से निकोटिन पैच लगाकर स्कैन रूम में जाना सही नहीं है क्योंकि उसमें एल्यूमीनियम के कुछ अंश होते हैं। स्कैनर चलने के वक्त ये पैच गर्म हो सकते हैं जिससे मरीज जल सकता है।