किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से है, इसमें होने वाली समस्याओं का असर पूरे शरीर को प्रभावित कर सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को इस अंग को स्वस्थ रखने वाले उपाय करते रहना चाहिए। खान-पान और लाइफस्टाइल में होने वाली समस्याओं के कारण किडनी की बीमारियों का खतरा हो सकता है। पर क्या आप जानते हैं कि कुछ बीमारियां भी शरीर के इस अंग के कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती है। किडनी की बीमारियों की क्रोनिक स्थितियां काफी गंभीर भी हो सकती हैं।
अलर्ट: किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं ये बीमारियां, इन लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत
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डायबिटीज में किडनी की समस्या
डॉक्टर्स ने पाया कि डायबिटीज की अनियंत्रित स्थिति किडनी की बीमारियों का कारण बन सकती है। मधुमेह वाले रोगियों में किडनी फेलियर और इसकी गंभीर जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है। टाइप-1 और टाइप-2 दोनों प्रकार की डायबिटीज की स्थिति आपकी किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है। यदि ब्लड शुगर का स्तर अक्सर बढ़ा हुआ रहता है तो यह किडनी फेलियर का भी कारण हो सकती है।
ब्लड प्रेशर बढ़ना भी नुकसानदायक
ब्लड शुगर बढ़ने के अलावा ब्लड प्रेशर बढ़ने की स्थिति भी किडनी के लिए दिक्कतें बढ़ाने वाली हो सकती है। उच्च रक्तचाप के कारण किडनी की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे उसका सामान्य कामकाज प्रभावित हो जाता है। किडनी की रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त होने के कारण शरीर से अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ को निकालना कठिन हो जाता है। ब्लड प्रेशर वाले लोगों को किडनी को स्वस्थ रखने वाले उपाय करते रहना चाहिए।
पेशाब पथ का संक्रमण भी हानिकारक
यदि आपको भी बार-बार पेशाब पथ का संक्रमण (यूटीआई) होती रहती है तो इसे किडनी के लिए नुकसानदायक माना जा सकता है। विशेषतौर पर इसका खतरा डायबिटीज रोगियों में अधिक देखा जाता रहा है। यूटीआई से बचाव के उपाय करके भी किडनी की बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है। डॉक्टर्स ने पाया कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यूटीआई संक्रमण होने का जोखिम अधिक हो सकता है।
किडनी की बीमारियों के इन कारणों के बारे में भी जानिए
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया, कुछ अन्य शारीरिक स्थितियां भी किडनी के लिए दिक्कतें बढ़ाने वाली हो सकती हैं। इस बारे में भी लोगों को सावधानी बरतते रहना चाहिए।
- पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज (पीकेडी), यह एक आनुवंशिक विकार है जिसके कारण गुर्दे में कई सिस्ट विकसित हो जाते हैं।
- बहुत अधिक पेनकिलर दवाओं के कारण भी किडनी की दिक्कतें हो सकती हैं।
- बच्चों में हेमोलिटिक यूरेमिक सिंड्रोम की स्थिति।
- मेटल पॉइजनिंग या लेड पॉइजनिंग।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।