डायबिटीज हमारी सेहत के लिए कई प्रकार से जोखिमों का कारण हो सकती है। कुछ दशकों पहले तक इसे उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या के तौर पर जाना जाता था हालांकि अब कम उम्र के लोग भी इस क्रोनिक बीमारी के शिकार हो रहे हैं। ब्लड शुगर के अनियंत्रित रूप से बढ़ने की स्थिति शरीर के लिए कई प्रकार से समस्याकारक मानी जाती है। इससे शरीर के कई अंगों जैसे आंखों, तंत्रिका, हृदय-फेफड़े की समस्या बढ़ जाती है। डायबिटीज, आपमें संक्रमण होने के जोखिमों को भी कई गुना तक बढ़ाने वाली हो सकती है।
Diabesity: डायबिटीज के साथ ये समस्या कई गुना तक बढ़ा देती है गंभीर रोगों का जोखिम, हो सकता है हार्ट अटैक
डायबिसिटी: डायबिटीज और मोटापे की समस्या
मधुमेह और मोटापे का एक जटिल संबंध है। मोटापा न सिर्फ, टाइप-2 डायबिटीज के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है साथ ही यह डायबिटीज की जटिलताओं को भी कई गुना तक बढ़ाने वाली समस्या हो सकती है। डायबिसिटी के शिकार लोगों में इंसुलिन प्रतिरोध की समस्या अधिक देखी जाती रही है। इसके अलावा अगर आपका वजन और शुगर लेवल दोनों नियंत्रित नहीं है तो समय के साथ ऐसे रोगियों में हृदय रोगों और संक्रामक बीमारियों के विकसित होने का भी जोखिम अधिक हो सकता है।
बढ़ सकता है हृदय रोगों का खतरा
अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि डायबिटीज की अनियंत्रित स्थिति हृदय रोगों के लिए खतनाक है। ब्लड शुगर का बढ़ा हुआ स्तर आपकी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाने लग जाता है। समय के साथ, यह क्षति हृदय रोगों का भी कारण बन सकती है। बिना मधुमेह वाले लोगों की तुलना में मधुमेह वाले लोगों में कम उम्र में हृदय रोग विकसित होने की आशंका होती है।
वहीं यदि आपको डायबिटीज के साथ मोटापे की भी समस्या है तो ये खतरा कई गुना तक बढ़ जाता है। ऐसे लोगों में हार्ट अटैक का जोखिम अधिक देखा जाता रहा है।
इम्युनिटी हो सकती है कमजोर
हाइपरग्लेसेमिया यानी कि ब्लड शुगर की बढ़ी हुई स्थिति आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए भी काफी हानिकारक है। यही कारण है कि मधुमेह वाले लोग कई प्रकार के संक्रमणों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। वहीं यदि डायबिटीज के साथ आपका वजन भी अधिक है तो यह खतरा और भी बढ़ जाता है।
मोटापे की स्थिति के चलते शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती हैं, इससे डायबिटीज और इम्युनिटी सिस्टम दोनों पर दुष्प्रभाव का जोखिम रहता है।
वजन को रखें नियंत्रित
अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के शोधकर्ताओं ने बताया कि शरीर का वजन कम बनाए रखने से मधुमेह को रोकने या प्रबंधित करने में मदद मिल सकती है। शारीरिक गतिविधि में भाग लेना वजन कम करने और डायबिटीज दोनों को नियंत्रित रखने में सहायक हो सकता है। प्रत्येक सप्ताह मध्यम तीव्रता वाले एरोबिक व्यायाम के लिए 150-300 मिनट का लक्ष्य रखना आपको स्वस्थ रखने और डायबिसिटी के कारण होने वाली समस्याओं को कम करने में लाभकारी हो सकता है।
----------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।