पिछले दो साल से अधिक समय से वैश्विक स्तर पर जारी कोरोना महामारी ने लोगों को अलग-अलग तरह से प्रभावित करता है। कोरोना के सामने आए डेल्टा वैरिएंट के कारण जहां लोगों को गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का सामना करना पड़ा, वहीं ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स को अधिक संक्रामक माना जाता है। हाल ही में वैज्ञानिकों की एक टीम ने कोरोना के सबसे संक्रामक माने जा रहे XE वैरिएंट को लेकर भी अलर्ट जारी किया है। कोरोना को लेकर अब तक हुए तमाम शोध जीन, लिंग, पर्यावरण, आहार और कई अन्य कारकों को संक्रमण का संभावित जोखिम मानते आ रहे हैं। कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में कोरोना संक्रमण का जोखिम स्वाभाविक तौर पर अधिक बताया जाता रहा है।
कोरोना संक्रमण और लॉन्ग कोविड के जोखिम कारकों को जानने के लिए अध्ययन कर रही वैज्ञानिकों की एक टीम ने संक्रामक वायरस की प्रकृति को समझने की कोशिश की। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि किसी व्यक्ति के अंगुली की लंबाई बता सकती है कि उसे संक्रमण से ठीक होने के बाद लॉन्ग कोविड का कितना खतरा है? यानि कि आप अपने अंगुली का परीक्षण करके जोखिम का अंदाजा लगा सकते हैं। आइए आगे की स्लाइडों में इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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उंगलियों की लंबाई और कोविड-19 को लेकर अध्ययन
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उंगलियों की लंबाई और कोविड-19 का खतरा
यूके की स्वान्सी यूनिवर्सिटी, पोलैंड की मेडिकल यूनिवर्सिटी ऑफ़ लॉड्ज़ और स्वीडन के करोलिंस्का यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं की एक टीम ने कोरोना के जोखिम कारकों को समझने के लिए अध्ययन किया। इस दौरान पाया गया कि जिन लोगों की रिंग फिंगर यानी अनामिका, तर्जनी की तुलना में ज्यादा छोटी होती है, ऐसे लोगों में कोरोना संक्रमण की गंभीरता को खतरा अधिक हो सकता है। इसके अलावा, जिन लोगों के दाएं और बाएं हाथ की अंगुलियों के बीच के अंतर अधिक होता है, उनमें संक्रामक वायरस से गंभीर जटिलताओं और लॉन्ग कोविड का खतरा अधिक हो सकता है।
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कोरोना संक्रमण के जोखिम कारक
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हार्मोन्स और कोविड के जोखिम का संबंध
जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित इस अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों की अंगुली की लंबाई की जांच करके हार्मोन के स्तर का पता लगाने वाले पिछले अध्ययनों का मूल्यांकन किया। इस अध्ययन के अनुसार, अनामिका अंगुली का लंबा होना गर्भ में विकास के दौरान हाई टेस्टोस्टेरोन के स्तर का संकेत माना जाता है। वहीं तर्जनी का लंबा होना उच्च एस्ट्रोजन के स्तर का संकेत होता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि टेस्टोस्टेरोन और कोविड-19 की गंभीरता के बीच एक कड़ी हो सकती है।
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उंगलियों की माप और कोविड-19 का जोखिम
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अध्ययन में क्या पता चला?
इस शोध के लिए वैज्ञानिकों ने 154 प्रतिभागियों को शामिल किया, इनमें से 54 लोग कोविड-19 से रह चुके संक्रमित थे। इन प्रतिभागियों को दोनों हाथ की अंगुलियों की लंबाई मापी गई। अध्ययन के अंत में शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों की दूसरी-चौथी अंगुली और तीसरी-पांचवीं अंगुली के बीच का अंतर अधिक होता है, उन्हें अन्य लोगों की तुलना में गंभीर संक्रमण होने और बाद में लॉन्ग कोविड का खतरा भी अधिक हो सकता है।
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कोरोना के खतरे को लेकर रहें अलर्ट
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क्या कहते हैं शोधकर्ता?
शोधकर्ताओं का कहना है कि इस अध्ययन का सीधा सा मतलब है कि टेस्टोस्टेरोन के स्तर में कमी और एस्ट्रोजन की अधिकता, लोगों में गंभीर कोरोनावायरस संक्रमण और बाद में पोस्ट कोविड जटिलताओं के जोखिम को बढ़ा सकती है। चूंकि अध्ययन का दायरा छोटा है, ऐसे में यह पर्यावरणीय और तमाम मूल के लोगों में कितना फिट बैठता है, इसके लिए विस्तृत शोध की आवश्यकता है। फिलहाल हार्मोन के स्तर को ध्यान में रखा जाना चाहिए।