कोविड-19 के दुनियाभर में बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों से जल्द से जल्द वैक्सीन की दोनों डोज लगवाने की अपील कर रहे हैं। अध्ययनों में पाया गया है कि कुछ स्थितियों में लोगों को कोविड-19 का खतरा अधिक हो सकता है, गर्भावस्था उन्हीं में से एक स्थिति है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने अगस्त-सितंबर 2020 में देश में गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण को मंजूरी दे दी थी। हालांकि गर्भावस्था में टीकाकरण को लेकर लोगों के मन में शुरू से ही डर देखा जा रहा है। भले ही अध्ययनों में गर्भवती के लिए टीकाकरण को सुरक्षित बताया गया है, हालांकि इससे जुड़े कई सवाल लोगों के मन में अब भी बने हुए हैं। एक सवाल ऐसा ही है क्या कोविड-19 वैक्सीन प्री-टर्म बर्थ का कारण बन सकती है?
कोरोना संकट: क्या वैक्सीनेशन के कारण 'प्री-टर्म बर्थ' की हो सकती है समस्या? अध्ययन में सामने आई यह बड़ी जानकारी
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गर्भावस्था में टीकाकरण
रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने एक हालिया अध्ययन के निष्कर्ष का जिक्र करते हुए बताया कि गर्भावस्था में टीकाकरण कराना पूरी तरह से सुरक्षित है, यह बच्चे के जन्म के समय को प्रभावित नहीं करती है। 40,000 से अधिक गर्भवती महिलाओं पर किए गए इस अध्ययन में पाया गया है कि टीकाकरण किसी भी तरह से प्री-टर्म बर्थ या स्मॉल फॉर जेस्टेशनल ऐज (एसजीए) का कारण नहीं बनती है, यह पूरी तरह से सुरक्षित है। प्री-टर्म बर्थ या बच्चे के समय से पहले जन्म का मतलब 37 सप्ताह से पूर्व होने वाले जन्म से है। वहीं एसजीए वह स्थिति है जिसमें बच्चों का जन्म सामान्य से छोटे आकार में होता है।
अध्ययन में क्या पता चला?
इस अध्ययन के लिए 16-49 के आयुवर्ग की महिलाओं को शामिल किया गया। अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों में से 10,064 या लगभग 22 प्रतिशत को गर्भावस्था के दौरान कम से कम कोविड-19 वैक्सीन की एक खुराक मिल चुकी थी। अधिकांश (98.3 प्रतिशत) ने अपनी दूसरी या तीसरी तिमाही के दौरान टीकाकरण प्राप्त किया। ज्यादातर महिलाओं ने फाइजर-बायोएनटेक या मॉडर्न द्वारा विकसित एमआरएनए टीका लगवाया था। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि गर्भकाल में वैक्सीनेशन कराना सुरक्षित है।
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?
येल स्कूल ऑफ मेडिसिन में स्त्री रोग और प्रजनन विज्ञान की सहयोगी प्रोफेसर हीदर लिपकिंड कहती हैं, हमारे अध्ययन में टीकों को सुरक्षित पाया है। इससे प्री-टर्म बर्थ जैसा कोई जोखिम नहीं है। संभवत: लोगों तक इसको लेकर सही जानकारी नहीं पहुंच पा रही है इसलिए अभी भी दुनियाभर में गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण की दर काफी कम है। जिस तरह से कोविड के मामले और नए वैरिएंट्स बढ़ रहे हैं, ऐसे में टीकाकरण और भी आवश्यक हो जाता है।
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?
प्रोफेसर लिपकाइंड कहती हैं, अध्ययन के निष्कर्ष में हमने वैक्सीनों को गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित पाया है। गर्भवती में गंभीर बीमारी को रोकने के लिए कोविड-19 का टीका लगवाना महत्वपूर्ण है। सभी देशों को लोगों तक सही जानकारी पहुंचाते हुए गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
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स्रोत और संदर्भ
Vaccines During and After Pregnancy
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