पिछले साल दिसंबर में चीन के वुहान शहर से फैले कोरोना वायरस संक्रमण को करीब छह महीने होने को हैं। अनिश्चितताओं से भरे इस दौर में दुनिया बहुत हद तक बदल गई है। लोगों की जीवनशैली पर इस कोरोना संकट का गहरा असर पड़ा है। थिएटर से लेकर शॉपिंग मॉल तक और स्ट्रीट फूड से लेकर रेस्टॉरेंट तक, सबकुछ पीछे छूट गया है। लोगों को इंतजार है तो बस जल्दी से यह संकट टले और सबकुछ पहले जैसा सामान्य हो। लॉकडाउन 4.0 में आर्थिक गतिविधियां शुरू करने के लिए बहुत सारे प्रतिबंध हटाए हैं और ढील दी है। लेकिन चिंता की बात ये है कि अब भी कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं।
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कोरोना संग जीना है: मनोरंजन और खरीदारी से लेकर यात्राओं तक... ऐसे बदल जाएगी हमारी दुनिया
Sat, 23 May 2020 05:17 PM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Sat, 23 May 2020 05:17 PM IST
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लोगों की जीवनशैली पर कोरोना का गहरा असर पड़ा है
- फोटो : Amar Ujala/Pexels
कोरोना वायरस संक्रमण को करीब छह महीने होने को हैं
- फोटो : PTI
कोराना की निश्चित दवा या वैक्सीन आने में अभी वक्त लगेगा। ऐसे में इसकी कोई गारंटी नहीं है कि घूमने-फिरने, खरीदारी करने और रेस्तरां में खाने की तमन्ना और अन्य सारे शौक जल्दी पूरे होंगे। कम से कम निकट भविष्य में लॉकडाउन से पहले जैसी सामान्य स्थिति वापस आना मुश्किल है। सोशल डिस्टेंसिंग, समय-समय पर हाथ धोना, हाथ मिलाने की जगह दूर से ही नमस्ते करना, साफ-सफाई बरतना...ऐसी कई सारी आदते हैं जो लॉकडाउन पूरी तरह खत्म होने के बाद भी बनी रह सकती है। आइए, बात करते हैं कोरोना की वजह से आने वाले बदलावों के बारे में:
नेटफ्लिक्स, अमेजन जैसे प्लेटफॉर्म पर काफी कुछ है मौजूद
- फोटो : Amar Ujala, Mumbai
मनोरंजन का नया ठिकाना: नेटफ्लिक्स, अमेजन जैसे प्लेटफॉर्म
- कोरोना महामारी के दौर में नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम, अल्ट बालाजी जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म हमारे मनोरंजन का साधन बने हुए हैं। हर तरह की वेब सीरिज से लेकर फिल्में यहां आसानी से उपलब्ध है। महामारी के दौर में इसकी व्यूअरशिप यानी दर्शक संख्या काफी बढ़ी है। थिएटर में आपकी पसंदीदा फिल्में रिलीज होने के बाद पहले दिन का पहला शो देखने की अवधारणा बदलेगी। घर से तैयार होकर निकलने की बजाय घर में आरामदायक कपड़ों में फिल्म, लाइव शो, मैच आदि ओटीटी पर देखना ज्यादा सुविधाजनक लगेगा।
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शॉपिंग: प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
शॉपिंग: जरूरत और विलासिता में अंतर
- कोरोना दौर ने लोगों को जरूरत और विलासिता का अंतर अच्छे से समझाया है। लोग समझने लगे हैं कि जीवन जीने की जरूरतें बहुत ही सीमित है, जबकि शो-ऑफ के लिए खरीदारी की मानसिकता विलासिता से जुड़ी है। जीवन की जरूरतें क्या है, दो जोड़ी कपड़े, रहने को घर और ताजा भोजन... बस न? कोरोना काल में हम यही तो कर रहे, ऐसा जीवन ही जी रहे। ऑफिस के सहकर्मियों, दोस्तों या फिर आसपास के लोगों को दिखाने के लिए पैसे खर्च करने यानी कि सीधे ऐसा कहा जाए कि शॉपिंग की आदतों में बदलाव दिखेगा। क्योंकि लोग समझ रहे हैं कि उन्हें वास्तव में जीवन जीने और खुश रहने के लिए आवश्यकताएं कितनी कम है।
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इमरजेंसी फंड
- फोटो : अमर उजाला
इमेर्जेंसी फंड: संभावित कठिन दौर के लिए पैसे बचाए रखना प्राथमिकता
- कोरोना महामारी के कारण दुनियाभर की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। इस दौर में लोगों को एक चीज यह जरूर समझ में आई है कि बचत की आदत होनी कितनी जरूरी है। बहुत सारे कंपनियों ने वेतन कटौती की है, तो बहुत सारे लोगों को बेरोजगार होना पड़ा है। जिनकी नौकरी सुरक्षित है, उन्हें भी समझ में आया है कि आपातकाल में पैसे की अचानक जरूरत पड़ सकती है।