स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस से गंभीर रूप से बीमार 30 फीसदी तक मरीजों को खून के थक्कों के बनने की घातक स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
कोरोना वायरस: मरीजों के शरीर में खून के थक्के बनना हो रहा घातक, जान पर आफत
पूरी दुनिया में मरीजों को इस वायरस की वजह से कई तरह की दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इनमें से कुछ दिक्कतें ऐसी भी हैं जिनसे मरीज की मौत तक हो सकती है।
माइक्रो-क्लॉट्स की समस्या
मार्च में जब कोरोना वायरस पूरी दुनिया में तेजी से पांव पसार रहा था, उस वक्त डॉक्टरों को अस्पताल में भर्ती बड़ी तादाद में ऐसे मरीज मिले जिन्हें खून के थक्के जमने की दिक्कत हो रही थी। ऐसे मरीजों की संख्या डॉक्टरों की आशंका से कहीं ज्यादा थी।
डॉक्टरों को और भी कई चौंकाने वाली चीजों का पता चला। मसलन, कुछ मरीजों के फेफड़ों में सैकड़ों की संख्या में माइक्रो-क्लॉट भी पाए गए थे। इस वायरस की वजह से डीप वेन थ्रोंबोसिस के मामलों में भी इजाफा दर्ज किया गया है। डीप वेन थ्रोंबोसिस ऐसे खून के थक्के होते हैं जो कि आमतौर पर पैर में पाए जाते हैं। अगर इनके टुकड़े होकर शरीर के ऊपरी हिस्से फेफड़े में पहुंचने लगते हैं तो इससे जान को जोखिम हो सकता है। इनसे रक्त वाहिकाएं अवरुद्ध हो जाती हैं।
गंभीर खतरा
पिछले महीने आर्टिस्ट ब्रायन मैकक्ल्योर को निमोनिया की शिकायत के चलते अफरातफरी में हॉस्पिटल लाना पड़ा था। लेकिन, हॉस्पिटल में भर्ती होने के तुरंत बाद हुए स्कैन में पता चला कि उनके लिए जिंदगी की जंग कहीं ज्यादा मुश्किल भरी है।
वह बताते हैं, "मेरे फेफड़ों की स्क्रीनिंग हुई और इससे पता चला कि मेरे फेफड़ों में खून के थक्के जम गए हैं। मुझे बताया गया कि यह बेहद खतरनाक है। तब मुझे वाकई चिंता होने लगी थी। मुझे अंदाजा हो रहा था कि अगर मेरी हालत में सुधार नहीं हुआ तो मैं गंभीर संकट में पड़ जाऊंगा।" अब वह अपने घर पर ही रिकवरी कर रहे हैं।