दुनियाभर में कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण अभियान काफी तेजी से चल रहा है। ब्लूमबर्ग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, पूरे विश्व में अब तक लोगों को 46 करोड़ 85 लाख वैक्सीन की खुराक दी जा चुकी है। टीकाकरण के मामले में इस्रायल दुनिया में सबसे आगे चल रहा है। यहां 50 फीसदी से भी अधिक लोग ऐसे हैं, जिन्हें वैक्सीन की दोनों खुराक दी जा चुकी है। अमेरिका और भारत में भी तेजी से टीकाकरण अभियान चल रहा है। इस बीच वैक्सीन को लेकर एक बुरी खबर भी सामने आ रही है। दरअसल, हांगकांग ने फाइजर की कोरोना वैक्सीन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। आइए जानते हैं कि आखिर इसके क्या कारण हैं...
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीनी दवा कंपनी फोसुन फार्मा ने फाइजर के टीके के एक बैच की बोतलों के ढक्कन खराब होने की जानकारी दी थी, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। हांगकांग सरकार की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, इन टीकों के इस्तेमाल को तत्काल रोक दिया गया है।
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हांगकांग सरकार के मुताबिक, फोसुन फार्मा अमेरिकी दवा कंपनी फाइजर के साथ मिलकर टीके की जांच कर रही है। हालांकि सरकार का कहना है कि इस टीके के सुरक्षित ना होने के कोई सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन एहतियाती तौर पर इसके इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है।
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हांगकांग सरकार के बयान के मुताबिक, फाइजर वैक्सीन की बैच संख्या-210202 की बोतलों के ढक्कन खराब मिले हैं, जिसकी जांच की जा रही है और साथ ही वैक्सीन की बैच संख्या-210104 की भी जांच की जाएगी। चूंकि अब हांगकांग में अस्थायी तौर पर फाइजर की वैक्सीन पर रोक लगाई गई है, ऐसे में यहां के लोगों को फिलहाल चीनी वैक्सीन सिनोवैक का टीका लगवाना पड़ेगा।
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कितनी कारगर है फाइजर की वैक्सीन?
- फाइजर की वैक्सीन को कोरोना के खिलाफ काफी प्रभावी माना जा रहा है। हालांकि हाल ही में हुए एक शोध में यह दावा किया गया है कि कोरोना के कुछ नए वैरिएंट पर इस वैक्सीन से बनी एंटीबॉडी कम प्रभावी हो सकती है। सेल नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, शोध में यह पाया गया कि फाइजर का टीका लेने के बाद जो एंटीबॉडी बनी, वह ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में मिले कोरोना के नए स्ट्रेन पर कम प्रभावी थी।