केंद्र सरकार ने पूरे देश में कोविड वैक्सीन टीकाकरण के लिए सभी राज्यों और केंद्र प्रशासित राज्यों को पूरी तरह तैयार रहने के लिए कहा है। सरकार ने बताया है कि दो जनवरी को सभी राज्यों और केंद्र प्रशासित राज्यों में ड्राई रन किया जाएगा। हर प्रदेश की राजधानी में कम से कम तीन जगहों पर ड्राई रन किया जाएगा। कुछ प्रदेशों ने जिलों को भी शामिल किया है जो मुश्किल इलाकों में स्थित हैं। केंद्र सरकार ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने प्रधान सचिवों, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और राज्यों के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंस की और तैयारियों का जायजा लिया।
Coronavirus vaccine: भारत में कोरोना वैक्सीन के 'ड्राई रन' के लिए कैसी है तैयारी? जानिए इसके बारे में सबकुछ
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क्यों होगा ड्राई रन?
सरकार द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, ड्राई रन का उद्देश्य नए को-विन मोबाइल एप के इस्तेमाल को जमीन पर देखना है। इसके अलावा प्लानिंग और वैक्सीन देने की प्रक्रिया के बीच सामंजस्य बैठाने की कोशिश की जाएगी। इससे फील्ड पर काम कर रहे लोगों का कॉन्फिडेंस भी बढ़ेगा। सबकुछ 20 दिसंबर को जारी की गई ऑपरेशनल गाइडलाइन के मुताबिक किया जाएगा। ऑफिसर इन-चार्ज को 25 लोगों की पहचान करनी होगी, जिन्हें वैक्सीन देने के लिए चुना जाएगा। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इन सभी की जानकारियां को-विन एप पर अपलोड करने के लिए कहा जाएगा। ये सब एक मॉक ड्रिल की तरह होगा, किसी को भी असल वैक्सीन नहीं दी जाएगी।
भारत में अभी तक किसी वैक्सीन को मंजूरी नहीं मिली है। ड्राई रन का मकसद किसी को वैक्सीन देना नहीं है, जब वैक्सीन आ जाएगी, तो ये प्रक्रिया सही से काम करेगी या नहीं और इसमें क्या सुधार लाने होंगे, ड्राई रन में इसे समझने की कोशिश है। सरकार की प्रेस रिलीज के मुताबिक, देशभर में करीब 96,000 वैक्सीन देने वालों को इसके लिए ट्रेन किया गया है। सीएसआईआर के डायरेक्टर जनरल डॉक्टर शेखर माडे ने कहा, 'जब देश के सबसे बड़े ऑफिस से ये कहा जाता है कि हम वैक्सीन की डिलीवरी के लिए तैयार हैं, तो ये आत्मविश्वास देता है। मुझे लगता है कि सभी हेल्थकेयर वर्कर और वैज्ञानिकों में इस बात को लेकर उत्साह है कि हम कर सकते हैं।'
चार राज्यों में पहले हुआ था ड्राई रन
देश के चार राज्यों- असम, आंध्र प्रदेश, गुजरात और पंजाब में कोविड-19 वैक्सीन का ड्राई रन सोमवार, 28 दिसंबर से शुरू कर दिया गया था, जो कि दो दिन चला। आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले, गुजरात में राजकोट और गांधीनगर, पंजाब में लुधियाना और शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर) और असम के सोनितपुर और नलबाड़ी में ये मुहिम चलाई गई। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, ये ड्राई रन सफल रहा था और राज्यों द्वारा दिए गए कुछ सुझावों को शामिल किया जाएगा।
क्या है ड्राई रन?
यह एक रिहर्सल की तरह है। इसमें कोविड-19 वैक्सीन आने के बाद इसे किस तरह से लगाया जाना है? इसकी क्या तैयारियां होनी हैं? इन तमाम चीजों का परीक्षण किया जाना है। इसके जरिए यह भी देखा जाएगा कि वैक्सीनेशन के दौरान क्या-क्या अड़चनें आ रही हैं और उन्हें किस तरह से दूर किया जाना चाहिए। इसे मॉक ड्रिल भी कहा जा रहा है।
इसके बाद 50 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों और उसके बाद पहले से दूसरी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को यह वैक्सीन लगाई जानी है। राज्यों में इसे लेकर डेटाबेस बन रहे हैं। लोगों का रजिस्ट्रेशन होगा और फिर उन्हें मैसेज भेजकर वैक्सीन लगाने की तारीख, वक्त और सेंटर की जानकारी दी जाएगी। ट्रांसपोर्टेशन के लिए पहले राज्य और फिर वहां से क्षेत्रों और जिला मुख्यालयों और फिर स्वास्थ्य केंद्रों तक इन्हें पहुंचाया जाना है। को-विन नाम से एक आईटी प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है। इसी प्लेटफॉर्म के जरिए वैक्सीन लगाने का पूरा काम अंजाम दिया जाएगा। वैक्सीनेशन के इस ड्राई रन में वास्तविक वैक्सीन का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। वैक्सीन को छोड़कर इससे जुड़ी पूरी प्रक्रियाओं का वास्तविक आधार पर परीक्षण किया जाएगा।