कोरोना वायरस की महामारी पर चल रही बहसों में एक सवाल अक्सर उठता है कि इस बीमारी की दवा क्या है, इसका इलाज क्या है। जिन दवाओं से कोविड-19 के इलाज की संभावनाओं का पता लगाया जा रहा है, उसमें हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन भी एक है। ये दवा मलेरिया के अलावा ल्यूपस (एक तरह का चर्म रोग) और गठिया के इलाज में काम आती है। हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन नाम इसे बनाने में काम आने वाले क्लोरोक्वीन कंपाउड (रासायनिक मिश्रण) से आया है।
क्या हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा के कुछ खतरे भी हैं?
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हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के साइड इफेक्ट
हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर 'पाहो' की चेतावनी को एक तरफ रख भी दें तो अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कई मौकों पर साफ शब्दों में ऐसे संकेत दिए हैं कि कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी कोविड-19 का इलाज इस दवा से हो सकता है।
यूएस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक़ जो मरीज हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल दूसरी बीमारियों के इलाज के लिए करते हैं, उनमें साइड इफेक्ट्स के तौर पर सिर दर्द, चक्कर, भूख न लगना, पेट खराब होना, डायरिया या पेट में दर्द, उल्टी, त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ने की शिकायत देखी गई है।
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का कहना है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन एक ऐसी दवा है जो मलेरिया के रोगियों के लिए कारगर रहती है। मलेरिया के मरीज खाने के साथ इस दवा का इस्तेमाल करके इसके साइड इफेक्ट्स से बच सकते हैं। हालांकि कुछ विशेषज्ञ इसके दूसरे प्रभावों को लेकर आगाह करते हैं जो जानलेवा साबित हो सकते हैं।
दिल की बीमारी का खतरा
अमरीका के मेयो क्लिनिक ने 25 मार्च को एक बयान जारी कर चेतावनी दी थी कि मलेरिया रोधी दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और क्लोरोक्वीन, साथ ही एचआईवी के इलाज में काम आने वाली दवा लोपिनाविर और रिटोनाविर से हृदय रोगों का खतरा है और मरीज को अचानक दिल का दौरा भी पड़ सकता है।
मेयो क्लिनिक का कहना है, "हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन जैसी दवाएं कोशिका के स्तर पर एक खास पोटेशियम चैनल को ब्लॉक कर सकता है जो मनुष्य के दिल के इलेक्ट्रिकल रिचार्ज सिस्टम को कंट्रोल करता है। इस प्रक्रिया में किसी भी तरह का खलल पड़ने से दिल के धड़कनें असामान्य हो सकती हैं और मरीज को अचानक दौरा पड़ सकता है।"
मेयो क्लिनिक ने सिफारिश की है कि जिन मरीजों को ये दवाएं दी जा रही हैं, उनका नियमित रूप से इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) कराया जाए। छह अप्रैल को जारी हुई 'पाहो' की रिपोर्ट में भी दिल के मरीजों में दूसरी बीमारी के इलाज के दौरान हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल के असर का जिक्र किया गया है।
कोविड-19 के मरीज
फ्रांस के नीस में स्थित सेंटर हॉस्पिटल यूनिवर्सिटी के कार्डियोलॉजिस्ट एमिल फेरारी ने नीस-मैटिन अखबार को सात अप्रैल को बताया था, "हमें कोरोना वायरस से संक्रमित एक मरीज पर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एजिथ्रोमाइसीन (एक कंपाउंड जो अक्सर साथ में दिया जाता है) का टेस्ट रोक देना पड़ा था। दोनों दवाएं देने के बाद इस मरीज के दिल में कुछ समस्या आ गई थी।"
"सिर्फ हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन देने पर हृदय की तकलीफ बहुत कम थी। लेकिन कोविड-19 के मरीज को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के साथ एजिथ्रोमाइसीन दिए जाने पर उसकी स्थिति बिगड़ गई। दिल के दौरे का खतरा बढ़ गया। अगर किसी भी दवा से व्यक्ति के खून में पोटेशियम की मात्रा कम हो जाए, खून में ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाए तो ये उसका साइड इफेक्ट होगा।"
डॉक्टर एमिल फेरारी का कहना है, "अगर ये दवाएं दी जाती हैं तो मरीज के दिल पर इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम के जरिए निगरानी रखी जानी चाहिए।"
तकलीफ का सबब
फ्रेंच नेशनल एजेंसी फॉर सेफ्टी ऑफ मेडिसिंस (एएनएसएम) ने 10 अप्रैल को एक बयान जारी कर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के अवांछित प्रभावों के बारे में चेतावनी दी थी। इसके अलावा एजेंसी ने लोपिनाविर और रिटोनाविर जैसी दवाओं को लेकर भी कहा था कि कुछ मरीजों के लिए ये तकलीफ का सबब बन सकती है।
एएनएसएम ने कहा, "27 मार्च के बाद निगरानी में रखे गए सौ मरीजों में से हमने 53 मामलों में पाया कि व्यक्ति के दिल पर इसका नकारात्मक असर पड़ा था। इनमें से 43 मरीजों को सिर्फ हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन या साथ में एजिथ्रोमाइसीन भी दिया गया था।"
एजेंसी ने बताया, "मरने वाले चार लोगों में दिल के धड़कन की असामान्य रफ्तार के अलावा कई और लक्षण देखे गए थे। इसलिए शुरुआती जांच से ये पता चलता है कि इस तरह के इलाज से कई जोखिम खासकर दिल की बीमारी का खतरा जुड़ा हुआ है और कोविड-19 के मरीजों में ये बढ़ जाता है।"