दुनिया के कई देशों में एक बार फिर से बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामले अन्य देशों के लिए अलार्मिंग हैं। चीन और यूके के कई हिस्सों में ओमिक्रॉन के स्लील्थ वैरिएंट (BA.2) के मामले काफी तेजी से बढ़ते रिपोर्ट किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वैसे तो संक्रमितों के लक्षण हल्के स्तर के ही हैं, पर जिस रफ्तार से यह वैरिएंट लोगों को अपना शिकार बना रहा है, यह चिंता बढ़ाने वाली बात हो सकती है। भारत में भी स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को लगातार सुरक्षात्मक उपायों को प्रयोग में लाते रहने की सलाह दे रहे हैं जिससे संक्रमण के प्रसार और जोखिम को कम किया जा सके। हाल ही में देश में 12-18 साल तक के बच्चों के लिए वैक्सीनेशन की भी शुरुआत कर दी गई है।
Covid-19: वयस्कों की तुलना में बच्चों में कोरोना संक्रमण का कितना खतरा? अध्ययन में सामने आई यह बड़ी जानकारी
बच्चों में लंबे समय तक बनी रहती हैं एंटीबॉडीज
जर्नल पेड्रियाट्रिक में प्रकाशित एक हालिया शोध में वैज्ञानिकों ने बताया है कि पहले कोरोना के शिकार रह चुके बच्चों में प्राकृतिक रूप से विकसित एंटीबॉडीज कम से कम सात महीने तक प्रभावी रह सकती है। अध्ययन से पता चला है कि कोविड-19 से संक्रमित रह चुके 96 प्रतिशत बच्चों में सात महीने बाद तक एंटीबॉडी बनी रहीं। इस आधार पर शोधकर्ताओं का कहना है कि बच्चों को वयस्कों के मुकाबले कोरोना से जल्दी संक्रमित होने का जोखिम कम होता है।
अध्ययन में क्या पता चला?
अध्ययन के लिए, टीम ने टेक्सास में 5-19 वर्ष की आयु के 218 बच्चों के डेटा की जांच की गई। टीकों के रोलआउट से पहले, डेल्टा और ओमिक्रॉन संक्रमण के प्रसार के दौरान तीन बार ब्लड सैंपल लिए गए। सैंपल की जांच और अध्ययन के परिणाम में वैज्ञानिकों ने पाया कि कोविड-19 से संक्रमित रह चुके 96 प्रतिशत बच्चों में संक्रमण के बाद सात महीने तक इस बीमारी के प्रति सुरक्षात्मक एंटीबॉडी प्रभावी थीं। शोधकर्ताओं का कहना है कि प्राकृतिक सुरक्षा के साथ वैक्सीन देकर बच्चों को कोरोना के खतरे से काफी हद तक सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।
क्या कहते हैं वैज्ञानिक?
ह्यूस्टन में यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास हेल्थ की शोधकर्ता सारा मसीहा कहती हैं, बच्चों में कोरोना के खतरे को जानने के लिए यह अध्ययन काफी महत्वपूर्ण है। एसिम्टोमैटिक, लक्षणों की गंभीरता, स्वस्थ वजन या मोटापा से ग्रसित, या लिंग के आधार पर, यह परिणाम सभी बच्चों में समान देखे गए हैं। बच्चों में लंबे समय तक प्राकृतिक एंटीबॉडीज मौजूद रह सकती हैं। वैक्सीनेशन अतिरिक्त सुरक्षा टूल साबित हो सकता है।
वैक्सीनेशन से बच्चे होंगे अधिक सुरक्षित
शोधकर्ताओं का कहना है कि बच्चों में भी कोरोना का खतरा रहता है। अमेरिका में अब तक 14 मिलियन से अधिक बच्चों में कोरोना वायरस का सकारात्मक परीक्षण किया जा चुका है, वैक्सीनेशन से उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा दी जा सकती है। हाल ही में भारत सरकार ने देश में 12-18 साल तक बच्चों के लिए तीन टीकों को मंजूरी दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए बच्चों को भी सुरक्षा के सभी उपायों का निरंतर ध्यान रखना चाहिए।
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स्रोत और संदर्भ
Durability of SARS-CoV-2 Antibodies From Natural Infection in Children and Adolescents
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