कश्मीर की हसीन वादियों की सैर करना हर पर्यटक की ख्वाहिश होती है। लेकिन, आज यहां सन्नाटा है। भय का माहौल है। हर वक्त गुलजार रहने वाली डल झील भी वीरान है। बदले हालात ने सब कुछ बदल कर रख दिया है।
पर्यटकों के नहीं आने से होटल भी खाली पड़े हैं। आने वाले दिनों की बुकिंग भी रद्द हो गई हैं। इस हालात ने पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों को काफी मायूस किया है। श्रीनगर की डल झील जिसमें तैरते शिकारे पर सवार होना हर किसी की इच्छा होती है, लेकिन आज इसके किनारों पर बने शिकारा घाट भी खाली हैं।
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- फोटो : Amar Ujala
करीब एक सप्ताह से अधिक समय से चहल पहल बंद होने से झील के पानी पर काई भी जमनी शुरू हो चुकी है। यह स्थिति सिर्फ डल झील की ही नहीं, बल्कि घाटी के सभी पर्यटन स्थलों की है। सभी जगह होटल, गेस्ट हाउस खाली पड़े हैं। पर्यटन विभाग के एक अधिकारी के अनुसार इस बार टूरिस्ट सीज़न की शुरुआत अच्छी थी।
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- फोटो : Amar Ujala
मार्च, अप्रैल, मई, जून के महीनों में अच्छी खासी संख्या में पर्यटक कश्मीर पहुंचे थे। उम्मीद थी कि इस वर्ष सीज़न अच्छा जाएगा, लेकिन वर्तमान हालातों की वजह से करीब 4000 होटल, गेस्ट हाउस आदि खाली पड़े हैं। पिलग्रिम एंड लेजर टूर ऑपरेटर फोरम (पिल्टोफ) के चेयरमैन नासिर शाह ने कहा कि घाटी में रोज़ाना करीब 5000 से 6000 पर्यटक आ रहे थे, लेकिन अब अगस्त तक की सभी बुकिंग रद्द हो गई हैं।
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शाह के अनुसार कश्मीर के हालातों के चलते टूरिस्ट हिमाचल प्रदेश की ओर डाइवर्ट हो गए हैं। इससे कश्मीर के पर्यटन को करीब 450 करोड़ का नुकसान हुआ है। शिकारा चालक अब्दुल रज़्ज़ाक के साथ ही सबको हालात सामान्य होने का इंतजार है। रज्जाक के अनुसार वह दिहाड़ी पर निर्भर हैं। रोज़ाना करीब 1000 से 1500 कमा लेते थे, लेकिन आजकल पर्यटक नहीं आ रहे हैं। पिछले एक सप्ताह से कोई काम नहीं किया। ऐसा लगता है हमारे कश्मीर को किसी की नज़र लग गई है। आम जनजीवन पटरी से उतर कर रह चुका है।