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तालिबानी बरादर के बिरादर की कहानी: दिल पर पत्थर रखकर मसूद को इस अधिकारी ने पहुंचाया था एयरपोर्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Mon, 23 Aug 2021 12:23 PM IST
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अब्दुल गनी बरादर, मसूद अजहर
- फोटो : सोशल मीडिया
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अफगानिस्तान संकट के बीच भारत समेत दुनिया की नजर तालिबान के अब्दुल गनी बरादर और जैश-ए-मोहम्मद के मसूद अजहर के रिश्तों पर है। दोनों एक दूसरे के मददगार हैं। दोनों ही देवबंदी हैं। मसूद अजहर की रिहाई में बरादर और बरादर की फरारी में मसूद का हाथ रहा है। मसूद अजहर बरादर का आतंकी बिरादर है। मसूद अजहर की रिहाई के लिए भारतीय जहाज आईसी-814 को हाईजैक किया गया था। जिसमें बरादर का हाथ माना जाता है।
इन दोनों का जन्म 1968 में हुआ। साल 2009 के बाद बरादर को अमेरिकी एजेंसियों के डर से फरार होना पड़ा। इस दौरान मसूद अजहर ने उसे पाकिस्तान में शरण दिलाई थी। सूत्रों का यह भी कहना है कि आतंकी हमलों में आईईडी धमाकों को बढ़ाने में भी बरादर का ही दिमाग था। मसूद अजहर भारत का सबसे बड़ा दुश्मन है। बरादर के मजबूत होने से मसूद को भी ताकत मिलेगी। कश्मीर में तालिबान के खतरे पर हाल ही में कश्मीर जोन के आईजी विजय कुमार कह चुके हैं कि हम सभी चुनौतियों से पेशेवर तरीके से निपटेंगे और हम पूरी तरह सतर्क हैं। अब आपको बताते हैं उस अधिकारी के बारे में जिसे आज भी मसूद अहजर को छोड़े जाने का मलाल है...
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अजहर मसूद
- फोटो : पीटीआई
हम बात कर रहे हैं जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी डॉ एसपी वैद की। उन्हें आतंकी अजहर मसूद को कंधार कांड के दौरान छोड़े जाने का मलाल है। वह उस समय जम्मू के डीआईजी थे और अजहर मसूद कोट भलवाल सेंट्रल जेल में बंद था। उसे लेने के लिए दिल्ली से स्पेशल प्लेन टेक्निकल एयरपोर्ट आ चुका था। उसे वहां तक पहुंचाने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई थी। उस समय उन्होंने दिल पर पत्थर रखकर उसे एयरपोर्ट तक पहुंचाया था।
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी डॉ. एसपी वैद (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
डॉ. वैद पुलिस विभाग में 34 साल से अधिक समय तक अलग-अलग पदों पर रहे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में विलेज डिफेंस कमेटी (वीडीसी) और कम्युनिटी पुलिसिंग शुरू की।
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी डॉ. एसपी वैद
- फोटो : फाइल
आतंकियों की ओर से उन पर चार बार हमला किया गया। एक हमले में वह एक हाथ की एक उंगली कट गई।
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी डॉ. एसपी वैद, गिलानी
- फोटो : अमर उजाला
सिर में चोट लगने के कारण ऑपरेशन कराना पड़ा। उनके डीजीपी रहते हुए पहली बार अलगाववादियों पर शिकंजा कसा गया।
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