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बल्लभ भाई पटेल और कश्मीर विलय से पहले के 72 घंटो की अनसुनी कहानी

Tue, 28 Feb 2017 12:14 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू Updated Tue, 28 Feb 2017 12:14 PM IST
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story of kashmir accession in india
सरदार पटेल
कश्मीर के भारत में विलय से पहले 72 घंटों में कई बड़े फैसले हुए थे। दरअसल कश्मीर के विलय के लिए जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह को मनाना बड़ी चुनौती थी लेकिन सरदार बल्लभ भाई पटेल से बातचीत और तमाम घटनाक्रमों के बीच अंततः महाराजा हरि सिंह कश्मीर के भारत में विलय को राजी हो गए। जानें कश्मीर के भारत में विलय की एक अनसुनी कहानी। 
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महाराजा हरि सिंह - फोटो : File Photo
कश्मीर को लेकर विवाद और फिर महाराजा हरि सिंह द्वारा विलय पत्र पर हस्ताक्षर की पृष्ठभूमि भारत की आजादी के साथ शुरू हुई। 
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सरदार पटेल
सरदार वल्लभ भाई पटेल जब देश की तमाम रियासतों का भारतीय संघ में विलय करवाने में जुटे थे तब जम्मू-कश्मीर, जूनागढ़ और हैदराबाद पर मामला अटका था। 
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पाकिस्तान - फोटो : Demo Photo
जम्मू-कश्मीर रियासत की मुस्लिम बहुलता को देखते हुए पाकिस्तान ने इसे कब्जाने की कोशिश की। 
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हरि सिंह - फोटो : File Photo
24 अक्तूबर, 1947 की सुबह हजारों की तादाद में कबायली कश्मीर में घुस आए। वे श्रीनगर पर कब्जा करना चाहते थे। महाराजा ने भारत से मदद मांगी। 
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