कश्मीर के भारत में विलय से पहले 72 घंटों में कई बड़े फैसले हुए थे। दरअसल कश्मीर के विलय के लिए जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह को मनाना बड़ी चुनौती थी लेकिन सरदार बल्लभ भाई पटेल से बातचीत और तमाम घटनाक्रमों के बीच अंततः महाराजा हरि सिंह कश्मीर के भारत में विलय को राजी हो गए। जानें कश्मीर के भारत में विलय की एक अनसुनी कहानी।
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महाराजा हरि सिंह
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कश्मीर को लेकर विवाद और फिर महाराजा हरि सिंह द्वारा विलय पत्र पर हस्ताक्षर की पृष्ठभूमि भारत की आजादी के साथ शुरू हुई।
सरदार वल्लभ भाई पटेल जब देश की तमाम रियासतों का भारतीय संघ में विलय करवाने में जुटे थे तब जम्मू-कश्मीर, जूनागढ़ और हैदराबाद पर मामला अटका था।
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पाकिस्तान
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जम्मू-कश्मीर रियासत की मुस्लिम बहुलता को देखते हुए पाकिस्तान ने इसे कब्जाने की कोशिश की।
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हरि सिंह
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24 अक्तूबर, 1947 की सुबह हजारों की तादाद में कबायली कश्मीर में घुस आए। वे श्रीनगर पर कब्जा करना चाहते थे। महाराजा ने भारत से मदद मांगी।