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सरकारी नौकरी छोड़ गरीबों के लिए खोल ली क्लीनिक, करते हैं मुफ्त ऑपरेशन
रवि वर्मा, अमर उजाला/जम्मू
Updated Tue, 04 Oct 2016 02:06 PM IST
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डा. आसिफ इकबाल
- फोटो : Amar Ujala
डाक्टरों के नोबेल प्रोफेशन को कुछ लोग बदनाम भी करते हैं, लेकिन कुछ डाक्टर ऐसे भी हैं जो गरीबों की सेवा के लिए सरकारी नौकरी तक छोड़ देते हैं। ऐसे ही एक डाक्टर राजोरी में भी हैं, जो सरकारी नौकरी छोड़ प्राइवेट क्लीनिक चला कर गरीबों को रोशनी प्रदान करने का नेक काम कर रहे हैं।
नेत्र विशेषज्ञ डा. आसिफ इकबाल शहर में आई क्लीनिक चला कर गरीब लोगों के मोतियाबिंद के मुफ्त आपरेशन कर रहे हैं।जिले की थन्नामंडी तहसील के दूरदराज के गांव दोदासनबाला के निवासी डा. इकबाल को करीब पांच वर्ष पहले जिला अस्पताल में नेत्र विशेषज्ञ के पद पर नियुक्त किया था, लेकिन जिले में गरीब जनता की मुफ्त सेवा करने के जज्बे ने उन्होंने कुछ महीने बाद ही नौकरी छोड़ अपना क्लीनिक खोल लिया।
डा. आसिफ अपने आई केयर सेंटर में अब तक सौ से भी अधिक लोगों के मोतियाबिंद का मुफ्त आपरेशन कर चुके हैं। अमर उजाला के साथ एक विशेष बातचीत में डा. आसिफ ने बताया कि जिले में हजारों लोग इतने गरीब हैं कि वे मोतियाबिंद के आपरेशन का खर्च नहीं उठा सकते हैं।
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नेत्र विशेषज्ञ डा. आसिफ इकबाल शहर में आई क्लीनिक चला कर गरीब लोगों के मोतियाबिंद के मुफ्त आपरेशन कर रहे हैं।जिले की थन्नामंडी तहसील के दूरदराज के गांव दोदासनबाला के निवासी डा. इकबाल को करीब पांच वर्ष पहले जिला अस्पताल में नेत्र विशेषज्ञ के पद पर नियुक्त किया था, लेकिन जिले में गरीब जनता की मुफ्त सेवा करने के जज्बे ने उन्होंने कुछ महीने बाद ही नौकरी छोड़ अपना क्लीनिक खोल लिया।
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डा. आसिफ अपने आई केयर सेंटर में अब तक सौ से भी अधिक लोगों के मोतियाबिंद का मुफ्त आपरेशन कर चुके हैं। अमर उजाला के साथ एक विशेष बातचीत में डा. आसिफ ने बताया कि जिले में हजारों लोग इतने गरीब हैं कि वे मोतियाबिंद के आपरेशन का खर्च नहीं उठा सकते हैं।
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दुआ को मानते हैं फीस, दवा और चश्मा भी देते हैं मुफ्त
मुफ्त में देते हैं दवा
- फोटो : Demp Pic.
उन्हें जब इस बात का एहसास हुआ तो लोगों की सेवा करने का मन बना लिया। जिन लोगों के मोतियाबिंद का मुफ्त आपरेशन किया है, उनकी आंखों में आईओ लेंस डालने का खर्च भी अपनी ही जेब से उठाया है। इतना ही नहीं, आपरेशन के बाद उन्हें दी जाने वाली दवाएं और चश्मा भी मुफ्त में प्रदान करते हैं।
मोतियाबिंद के अलावा आंखों से जुड़े अन्य रोगाें से ग्रस्त यदि कोई गरीब मरीज उनके पास आता है तो वह उसकी जांच और पूरा उपचार भी मुफ्त में करते हैं। अपने क्लीनिक में प्रैक्टिस में वह जो रुपये कमाते हैं, उसे गरीबों की सेवा में लगा देते हैं।
डा. आसिफ ने बताया कि उन्हें गरीबों की सेवा के बाद मन की जो शांति प्राप्त होती है, उसे वह बयां नहीं कर सकते। गरीब उन्हें दुआ देते हैं और उस दुआ को ही वह अपनी फीस समझ लेते हैं। जब तक सांसें चलेंगी, वह इसी प्रकार से गरीब लोगों की जिंदगियों को रोशन करते रहेंगे।
मोतियाबिंद के अलावा आंखों से जुड़े अन्य रोगाें से ग्रस्त यदि कोई गरीब मरीज उनके पास आता है तो वह उसकी जांच और पूरा उपचार भी मुफ्त में करते हैं। अपने क्लीनिक में प्रैक्टिस में वह जो रुपये कमाते हैं, उसे गरीबों की सेवा में लगा देते हैं।
डा. आसिफ ने बताया कि उन्हें गरीबों की सेवा के बाद मन की जो शांति प्राप्त होती है, उसे वह बयां नहीं कर सकते। गरीब उन्हें दुआ देते हैं और उस दुआ को ही वह अपनी फीस समझ लेते हैं। जब तक सांसें चलेंगी, वह इसी प्रकार से गरीब लोगों की जिंदगियों को रोशन करते रहेंगे।