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1971 विजय दिवस: जानें कैसे एक भारतीय जांबाज से हारी कश्मीर कब्जा करने आई पाक की सेना

Fri, 16 Dec 2016 10:16 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू Updated Fri, 16 Dec 2016 10:16 PM IST
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story of 1971 indo pak war held on 16 dec
1971 war - फोटो : File Photo
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में 95000 पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था। इसी के साथ बांग्लादेश बना। इस युद्ध में से.ले. अरुण खेत्रपाल ने उच्चतम वीरता और साहस का परिचय दिया।
story of 1971 indo pak war held on 16 dec
1971 - फोटो : File Photo
दरअसल पाकिस्तान की योजना कश्मीर पर कब्जा करने की थी। इसके लिए उसने बड़ी संख्या में सियालकोट सेक्टर में अपनी फौज को तैनात कर दिया और शकरगढ़ सेक्टर में बसंतर नदी (सांबा) से टैंकों के जरिये हमला बोल कर जम्मू-कश्मीर को पंजाब से अलग-थलग करना चाहता था। 
story of 1971 indo pak war held on 16 dec
1971 - फोटो : File Photo
15 दिसंबर को अरुण खेत्रपाल एक आर्म्ड स्क्वार्डन की कमान संभाल रहे थे। इसी दौरान एक-दूसरे स्क्वार्डन को दुश्मन की सेना का सामना करने के लिए मदद की जरूरत पड़ी और उन्हें मदद के लिए ब्रिगेड मुख्यालय जरपाल पहुंचने का संदेश मिला। 
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story of 1971 indo pak war held on 16 dec
1971 - फोटो : File Photo
रास्ते में लैंडमाइंस बिछी थी, जिनको हटाने के लिए कुछ और दिन लगने थे। दुश्मन की तरफ से गोलाबारी भी जारी थी। 
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story of 1971 indo pak war held on 16 dec
1971 - फोटो : File Photo
इन सब बाधाओं की परवाह किए बगैर वे पूना हॉर्स की स्क्वार्डन लेकर 16 दिसंबर की सुबह जरपाल पहुंच गए। 
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