कोरोना महामारी के बीच घर बैठे और चंचल मन को कठुआ जिले के 11 साल के रिगव ने ऐसा संभाला कि अब उसके हाथों के जादू से उसकी बनाई तस्वीरें बोलती नजर आती हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि इन तस्वीरों से निकलकर अभी कोई बाहर आएगा और बात करने लगेगा। छह महीने पहले तक रिगव के लिए यह सपने जैसा था, लेकिन उसने अपनी प्रतिभा को निखारना शुरू किया और आज कई लोग उसकी प्रतिभा के मुरीद हो चुके हैं।
कठुआ के बेटे रिगव आनंद ने बीते छह महीनों में ही 120 से ज्यादा स्केच तैयार किए हैं, जिससे आज वह खूब वाहवाही लूट रहे हैं। रिगव ने न सिर्फ जीवित शख्सियतों को स्केच पर उकेरा है, बल्कि अपनी कल्पना से कई ऐसी तस्वीरें भी तैयार की हैं, जो किसी बड़े कलाकार के लिए भी अचंभा हैं। हाल ही में एक साधु की तैयार की हुई तस्वीर ऐसी है, जैसे मानो कागज में जान भर दी हो।
रिगव के पिता मुनीष आनंद पुलिस विभाग में वरिष्ठ अफसर और माता नम्रता आनंद शिक्षक हैं। यह परिवार वर्तमान में जम्मू के छन्नी हिम्मत में रह रहा है। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के बीच छठी कक्षा में पढ़ रहे रिगव ने अपने समय का सदुपयोग किया, जिससे वे बेहद संतुष्ट हैं। अन्य बच्चों से अलग रिगव ने कोरोना के दौरान यूट्यूब पर जम्मू के ही चित्रकार शुभम डोगरा के वीडियो देखकर प्रेरणा ली।
अपनी व्यक्तिगत रुचि क्रिकेट को देखते हुए रिगव ने सादी पेंसिल के साथ ही पहला स्केच विराट कोहली का बनाया, जिसे देखकर परिवार के सदस्यों को यकीन हो गया कि उसके हाथों में बारीकियों को उकेरने वाला जादू है। 11 वर्षीय रिगव को इसके बाद परिवार का भरपूर सहयोग मिला और वो लगातार स्केच बनाते चले गए।
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11 साल के रिगव ने बनाया स्केच
- फोटो : अमर उजाला
खास बात यह है कि शनिवार को ही रिगव अपने मेंटर शुभम डोगरा से भी पहली बार मिला और उन्हें उनका स्केच भेंट किया। इससे पहले रिगव शुभम से कभी नहीं मिला था। रिगव का सपना है कि उनकी ओर से बनाए गए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के स्केच को भी वो जल्द उनसे मुलाकात कर उन्हें भेंट करें।