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किताबों की दुनिया: 144 साल पुरानी रणबीर लाइब्रेरी जम्मू में छिपा किताबों का अथाह संसार, जल्द होगा डिजिटल

Sun, 13 Aug 2023 05:02 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Sun, 13 Aug 2023 05:02 PM IST
सार

144 साल पहले महाराजा रणबीर सिंह ने इस पुस्तकालय का निर्माण कराया था। 1879 में बनी इस लाइब्रेरी में 70 हजार से अधिक पुस्तकों का खजाना है।

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Ranbir Library Jammu: hundred and half years old Ranbir Library to digitized soon able to read historical book
रणबीर पुस्तकालय जम्मू - फोटो : निखिल मेहता

कच्ची छावनी मंदिरों के शहर का जाना-माना बाजार है। राजाओं के समय यहां सैनिकों की एक छावनी हुआ करती थी, जिसके बाद इस जगह का नाम कच्ची छावनी पड़ा। यहीं पर जम्मू कश्मीर की पहला सार्वजनिक पुस्तकालय भी स्थित है, जिसका नाम श्री रणबीर सिंह लाइब्रेरी है।



करीब 144 साल पहले महाराजा रणबीर सिंह ने इस पुस्तकालय का निर्माण कराया था। 1879 में बनी इस लाइब्रेरी में 70 हजार से अधिक पुस्तकों का खजाना है, जिसमें हिंदी में 21 हजार पुस्तकें, अंग्रेजी भाषा की 44 हजार, उर्दू की 11 हजार, डोगरी की एक हजार, पंजाबी की 1400 और कश्मीर की 300 से अधिक पुस्तकें हैं। ये पुस्तकालय आज भी जम्मू में एक अहम ज्ञान के केंद्र के तौर पर अपना प्रकाश बिखेर रहा है। हर रोज शहर के अलग-अलग कोनों के करीब दो सौ लोग यहां पहुंचते हैं और किताबों के अथाह संसार से रूबरू होते हैं। 

Ranbir Library Jammu: hundred and half years old Ranbir Library to digitized soon able to read historical book
रीडिंग रूम में पढ़तीं युवतियां - फोटो : निखिल मेहता

यहां सिर्फ वयस्कों के लिए ही नहीं, बल्कि बच्चों का भी एक कोना बनाया गया है। जिसमें पांच हजार किताबें हैं। उनकी उम्र के मुताबिक किताबें मौजूद हैं। लाइब्रेरी को कई हिस्सों में बांटा गया है। यहां विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों के लिए रीडिंग रूम है, जो कि युवतियों के लिए अलग है तो युवकों के लिए अलग। हर हिस्से की अपनी एक खूबसूरती है। फिर देर किस बात की है। तो मेंबर बनिए और पहुंच जाइए किताबों के संसार में।

न्यूजपेपर और मैगजीन सेक्शन में पढ़ें देश-दुनिया की हलचल

यहां राष्ट्रीय और स्थानीय समाचार पत्र भी उपलब्ध होते हैं। इसके अलावा यहां कई अहम पत्रिकाओं भी पत्रिकाएं भी होती हैं। रोजाना 19 अखबार और 14 मैगजीन लोगों को पढ़ने के लिए उपलब्ध हैं। लाइब्रेरी में धार्मिक, कानूनी, आध्यात्मिक, शैक्षणिक, ऐतिहासिक, स्वास्थ्य, राजनीतिक, संस्कृति और कला सहित विभिन्न विषयों पर दुर्लभ पुस्तकों का एक अनूठा संग्रह है। जो एक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के लेखक द्वारा रचित है।

Ranbir Library Jammu: hundred and half years old Ranbir Library to digitized soon able to read historical book
रीडिंग रूम में पढ़ते युवा - फोटो : निखिल मेहता

ऐसे मिलती है रीडरशिप

लाइब्रेरी का मेंबरशिप कार्ड बहुत ही आसान तरीके से बनता है। इसके लिए किसी तरह की सिक्योरिटी फीस जमा नहीं करानी होती है। इसके एक फार्म भरकर जमा कराना होता है, जो कि राजपत्रित अधिकारी द्वारा अटेस्टेड होना अनिवार्य है। फार्म ऑनलाइन भी उपलब्ध है।

मेंबर बनने के बाद किताबों को घर के लिए इश्यू करा सकते हैं। एक व्यक्ति एक समय पर दो किताबें 14 दिन के लिए इश्यू करा सकता है। री इश्यू कराना हो तो फोन पर भी इसे कराया जा सकता है। बशर्तें किसी अन्य को उसी समय उस किताब की जरूरत न हो। किताबें वापस नहीं करने की स्थिति पर 10 रुपये रोजाना जुर्माना लगाने का प्रावधान है, जो 20 दिन के बाद और भी बढ़ जाता है।

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बुक डिस्पले कॉर्नर की झलक - फोटो : निखिल मेहता
रोज लगता है बुक डिस्पले कॉर्नर

पुस्तकालय में रोजाना बुक डिस्पले कॉर्नर लगाया जाता है। जिसमें हर दिन खास विषय की किताबों को प्रदर्शित किया जाता है। ताकि पुस्तकालय में आने वाले पाठक इन किताबों और उनके लेखकों के बारे में जान सकें।

किताबों और लोगों के बीच दूरी कम करने के लिए प्रयास जारी

किताबों और लोगों के बीच की दूरी को कम करने के लिए समय-समय पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। हाल ही में लेखक-पाठक मुलाकात और गेस्ट लेक्चर भी कराए गए हैं। किसी एक विषय पर किताब प्रदर्शनी पुस्तकालय में रोज लगाई जाती हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को लाइब्रेरी में जरूर लेकर आएं और उनमें पढ़ने की आदत विकसित करें। -सभ्यता, चीफ लाइब्रेरियन, एसआरएस पुस्तकालय।
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Ranbir Library Jammu - फोटो : निखिल मेहता

किताबें तो खूब हैं, लेकिन इंटरनेट भी हो

मैं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा हूं। पिछले चार महीनों से रोजाना आ रहा हूं। यहां को जो माहौल है, वो काफी प्रेरित करता है। लाइब्रेरी का स्टाफ काफी सहयोगी है। लेकिन यहां इंटरनेट की व्यवस्था भी होनी चाहिए। - हिमांशू, रिहाड़ी, जम्मू

पढ़ने के लिए है अनुकूल वातावरण

मैं तीन महीने से आ रहा हूं। यहां तो किताबें ही किताबें हैं। मैं सिविल सर्विस की तैयारी कर रहा हूं। यहां पर कंपटीशन की भी किताबें मौजूद हैं। यहां का वातावरण पढ़ाई के अनुकूल है। उम्मीद है जल्द यहां इंटरनेट की सेवा भी उपलब्ध होगी। -यासीर अरफत, राजोरी।

मैं इंजिनियर की पढ़ाई कर चुका हूं। यहां सभी चीजें व्यवस्थित और दुरस्त हैं। इंजीनियर फील्ड की कई पुरानी किताबें मौजूद हैं, लेकिन इस विषय से जुड़ी नई किताबों की कुछ कमी है, जिसे आगामी समय में बढ़ाया जाए तो अच्छा होगा। -अरवाज, डोडा।

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