जम्मू कश्मीर के राजौरी में गुरुवार सुबह आत्मघाटी हमलावरों ने आर्मी कैंप पर हमला कर दिया, जिसमें तीन जवान शहीद हो गए। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में दो आतंकी मारे जा चुके हैं। सेना का ऑपरेशन अभी जारी है। इस हमले ने उरी में सैन्य शिविर पर हुए हमले के जख्मों को ताजा कर दिया। उरी हमले के 10 दिन के अंदर भारतीय सैनिकों ने पीओके में घुसकर आतंकी शिविरों पर सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए दुनिया को बता दिया था कि ये भारत चुप नहीं बैठने वाला। ये भारत घर में घुसकर मारना जानता है।
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- फोटो : अमर उजाला
भारी हथियारों से लैस आतंकियों ने 18 सितंबर 2016 को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से सटी उरी तहसील में सेना के 12 इनफैंट्री ब्रिगेड मुख्यालय पर हमला बोलते हुए वहां सो रहे सैनिकों पर गोलीबारी कर दी थी। इस हमले में 19 जवान शहीद हो गए थे। उरी हमले को अगले महीने छह साल हो जाएंगे। उरी तहसील आज भी उस हमले से उबर नहीं पाई है। हमले के बाद से यहां और आसपास के लोगों की जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी है।
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हमले में 19 सैनिक हुए थे शहीद
चार आतंकवादी पीओके से निकलकर सलमाबाद नाले (झेलम नदी) से होते हुए उरी पहुंचे थे। उनके पास भारी मात्रा में हथियार और ग्रेनेड थे। उन्होंने पठानकोट हमले की तर्ज पर हमला किया था। तब भी आतंकियों ने नालों के रास्ते भारत में घुसपैठ की थी।
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उरी में तड़के लगभग पांच बजे उरी के आर्मी यूनिट में स्थित प्रशासनिक बेस कैंप के पिछले हिस्से में पहले हमला किया था। पठानकोट में भी तड़के ही हमला किया गया था। राजौरी की तरह उरी में भी आत्मघाती आतंकियों ने ही हमला किया था और उनका मकसद भारत को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहु्ंचाने का था।
ग्रेनेड से हमला करने के बाद सेना के तंबुओं में लगा दी थी आग
आतंकियों ने ग्रेनेड से हमला करने के बाद सेना के तंबुओं में आग भी लगा दी थी, जिससे सैनिकों को संभलने का मौका भी ना मिला। सेना के तत्कालीन डीजीएमओ के अनुसार, 12-13 जवानों की मौत तो सिर्फ आग लगने के कारण हुई थी।