PIX: क्या जानते हैं आप, कश्मीर के शिव मंदिर का राज
नारानाग जम्मू-कश्मीर गांदरबल जिले में २,१२८ मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक पर्वतीय पर्यटक स्थल है। यह कंगन से ८ किमी की दूरी पर सिन्द नाले (सिन्धु नदी से भिन्न) नामक नदी की घाटी पर अधिक ऊंचाई पर स्थित है।
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अपने मर्ग (घास के खुले मैदान), पर्वतों और झीलों के लिये जाने जाने वाले इस स्थान से १६,८४० फ़ुट ऊंचे हरमुख पर्वत और उसके चरणों में स्थित गंगाबल झील के लिये पगडंडी शुरु होती है। यह वंगथ झरने के बाएं किनारे पर बसा हुआ है, जो आगे चलकर सिन्द नाले में विलय होता है।
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यहां से गडसर झील, विशनसर झील और किशनसर झील के लिये भी रास्ते निकलते हैं हलांकि नारानाग से वहां तक पहुंचने के लिये ५ से ७ दिन का पैदल सफर तय करना पड़ता है।
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नारा नाग' वास्तव में 'नारायण नाग' का रूप है। कश्मीरी भाषा में 'नाग' का अर्थ पानी का चश्मा होता है। यहां का चश्मा हिन्दुओं द्वारा पवित्र माना जाता है।
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नारानाग के मंदिर पर्यटकों के लिये एक मुख्य आकर्षण हैं और भारत के सबसे महत्वपूर्ण पुरातन-स्थलों में गिने जाते हैं। यहां लगभग २०० मीटर की दूरी पर एक-दूसरे की तरफ मुख किये हुए मंदिरों का एक समूह है। इतिहासकारों के अनुसार शिव को समर्पित इन मंदिरों को ८वीं सदी में कश्मीर-नरेश ललितादित्य ने बनवाया था। यह मंदिर वंगत नदी के दाएं किनारे पर भूतशेर पर्वत ('भूतेश्वर पर्वत' का परिवर्तित रूप) के चरणों में स्थित हैं।