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कश्मीर में ये क्यों हो रहा है?: वापस लौट रहे मजदूरों की आंखों में खौफ, दबी जुबान में बताई आपबीती; छलका दर्द

Thu, 24 Oct 2024 05:44 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 24 Oct 2024 05:44 PM IST
सार

कश्मीर छोड़कर अपने घर जाने वाले मजदूरों की आंखों में खौफ साफ नजर आ रहा है। कोई भी खुलकर बात करने को राजी नहीं। घाटी में 50 हजार से अधिक मजूदर हैं, ऐसे में सभी को एक ही डर सताता है कि कहीं अगला नंबर उनका न हो। 

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Migrant workers scared of incidents of target killing leaving Kashmir and returning to their homes
रेलवे स्टेशन पर बैठा प्रवासी मजदूर - फोटो : अमर उजाला

कश्मीर में एक बार फिर से टारगेट किलिंग का दौर शुरू हो गया है। बीते दिनों हुई घटनाओं ने एक बार फिर से पुराने दिनों की याद दिला दी है। इन हमलों के बाद से प्रवासी मजदूरों की चिंता और बढ़ गई है। आतंकवादियों ने पहले बिहार के एक मजदूर को बुलाकर उसे गोली मार दी और फिर इस घटना के कुछ ही दिनों बाद ताबड़तोड़ फायरिंग करके छह मजदूरों को मौत के घाट उतार दिया जिसमें तीन मजदूर बिहार के रहने वाले थे। इसके बाद आज भी त्राल में यूपी के मजदूर को गोली मार दी गई। इन वारदातों के बाद से प्रवासी मजदूरों में दहशत का माहौल है। डर किस कदर घर कर गया है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अचानक से मजदूरों ने घाटी से पलायन शुरू कर दिया है। घाटी में मौजूदा समय में 50 हजार से अधिक प्रवासी मजदूर हैं। लगातार हो रहे हमलों के बाद से इनकी सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। 

Migrant workers scared of incidents of target killing leaving Kashmir and returning to their homes
प्रवासी मजदूरों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला

तीन साल पहले जैसे माहौल पैदा करने की हो रही कोशिश
आतंकियों ने 2021 में भी इसी तरह प्रवासी मजदूरों पर हमले किए थे। 16 और 17 अक्तूबर, 2021 को बिहार एवं यूपी के चार मजदूरों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। तब घाटी से बड़े स्तर पर प्रवासी मजदूरों ने पलायन किया था। अब फिर कश्मीर में वैसा ही माहौल पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

Migrant workers scared of incidents of target killing leaving Kashmir and returning to their homes
प्रवासी मजदूरों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला

एक साथ आए थे एक साथ जा रहे हैं
सोचा था खुशी-खुशी घर जाएंगे, नहीं जानते थे कि यूं डर के साथ जाना होगा। हम लोग एक साथ आए थे एक साथ जा रहे। जम्मू स्टेशन पर मंगलवार की रात मौजूद प्रवासियों की भीड़ के बीच, जिससे भी पूछो बस यही जवाब मिल रहा था। अमर उजाला की टीम ने मजदूरों से एक-एक कर पूछना शुरू किया। हर किसी की आंख में कहीं न कहीं एक डर था, जो उन्हें बोलने नहीं दे रहा था। खैर, बहुत कुरदने पर उन्होंने टुकड़ों में बोलना शुरू किया। अपने डर को उन्होंने कभी बदले मौसम तो कभी त्योहार का बहाना दिया। पर गांदरबल में हुए आतंकी हमले का खौफ कहीं न कहीं उन्हें परेशान किए था।

एक लाइन से हर किसी ने बताया कि वो श्रीनगर से आ रहे। शबीर की उम्र यही कोई 18 से 20 साल के आसपास होगी। बोला वहां ईंट बनाते हैं। क्यों जा रहे, इस सवाल पर खामोश, बगल में बैठा साथी बोला, माहौल कुछ बदला है, देखते हैं कि फिर कब आना होगा।

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Migrant workers scared of incidents of target killing leaving Kashmir and returning to their homes
प्रवासी मजदूरों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला

'देखते हैं दोबारा कब आएंगे'
शाबिर के आसपास बैठे लोगों ने खामोशी ओढ़ ली। बस इतना ही कहा कश्मीर से आए, अपने घर पश्चिम बंगाल जा रहे हैं। उसे विश्वास में लेने के लिए कहा कि हम भी कोलकाता से हैं, तुम्हारे घर के पास से आए है। तब जाकर उसकी झिझक मिटी। उनमें से एक साहिल ने बताया कि हम लोग वहां लंबे वक्त से हैं। 13 लोग हैं। गांदरबल का जिक्र करते ही, फिर वे एक दूसरे का मुंह देखने लगे। इसके बाद एक संशय भरी नजर से उन्होंने देखा और कहा कि हमें कुछ नहीं मालूम। बस घर जा रहे, देखते हैं दोबारा कब आएंगे। बोला- हम लोगों की ट्रेन कल आएगी। बहुत सारे लोग आए थे दोपहर में यहां, चले गए। उनमें से कुछ गांदरबल के भी थे।

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प्रवासी मजदूरों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला

जेड मोड़ टनल बना रही कंपनी के कर्मचारी भी घर लौटे, काम करने को नहीं मिल रहे मजदूर
जेड मोड़ टनल पर काम कर रही कंपनी के गांदरबल में तैनात एचआर से बात करने की कोशिश की गई। पता चला कि वो और टीम के कई सदस्य घर को चले गए हैं। वहीं जम्मू के करीब इलाकों में चल रहे निर्माण कार्यों को शुरू कराने पहुंची वेंडरों टीम ने बताया कि मजदूरों की अचानक से कमी हो गई है। जो मजदूर मौजूद हैं, उन्होंने अपनी कीमत बढ़ा दी है, वो भी बड़ी मुश्किल से तैयार हो रहे हैं। एप्को से ही जुड़ी एक टीम का कहना है कि फिलहाल चुनौती तो है काम करवाना।

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