मिठास और खास स्वाद के लिए दुनिया भर में मशहूर कश्मीर के सेब की इस बार बंपर पैदावार हुई है। पिछले साल 24 लाख मीट्रिक टन की तुलना में इस बार 28 लाख मीट्रिक टन सेब उत्पादन का अनुमान है। जल्दी तैयार होने वाली किस्मों का तुड़ान हो चुका है, लेकिन रॉयल डिलीशियस और राइड डिलीशियस प्रजाति के सेब अभी पेड़ों पर ही हैं। सेब की मांग आना शुरू हो गई है। बागवानी विभाग ने इसके लिए ई-मंडियों को सक्रिय कर दिया है।
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कश्मीरी सेब
- फोटो : बासित जरगर
जानकारी के अनुसार कश्मीर के अर्ली वैरायटी के सेब को मंडियों में भेजने का क्रम शुरू हो गया है। देरी से तैयार होने वाले सेब का तुड़ान कर सितंबर से बाजाराें में सप्लाई शुरू की जानी है, जिसे लेकर बागवान तैयारियों में जुट गए हैं। डिलीशियस वैरायटी के कश्मीरी सेब की बाजार में सबसे ज्यादा मांग होती है।
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कश्मीरी सेब
- फोटो : बासित जरगर
स्थानीय प्रजातियों के उत्पादन में बढ़ोतरी
कश्मीरी सेब की स्थानीय प्रजाति हजरत अली, तुरसी, गलामस्त, कंडीसन, रजातवाड़ी, बेलगेम, बलगेलिन और अमरी गोल्डन जल्दी तैयार हो जाती है। जुलाई में तुड़ान के बाद इसे बाजारों में भेजा जा रहा है। इस बार कोरोना संक्रमण में लॉकडाउन की पाबंदियों के बीच भी सेब को मंडियों में सप्लाई किया गया है। सेब की मांग अच्छी होने के चलते बागवानों का सीजन बेहतर रहने के आसार हैं।
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कश्मीरी सेब
- फोटो : बासित जरगर
पांच प्रतिशत सेब विदेशों में होगा निर्यात
पांच प्रतिशत सेब विदेशों में भेजा जाएगा। इसके लिए भी ई-मंडियों के माध्यम से डिमांड आ चुकी है। इसमें बढ़िया गुणवत्ता वाला सेब ही पैक कर भेजा जाएगा। यानी एक लाख मिट्रिक टन के करीब कश्मीरी सेब विदेशी बाजारों में जाएगा।
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कश्मीरी सेब
- फोटो : बासित जरगर
रॉयल और राइड प्रजाति के सेब का तुड़ान सितंबर से शुरू होगा। इससे पहले आठ प्रजातियों के सेबों को तोड़ कर बाजारों में भेजा जा रहा है। देशभर में कश्मीरी सेब की मांग आ रही है। -दिग्विजय सिंह, संयुक्त निदेशक, हार्टीकल्चर प्लानिंग एंड मार्केटिंग विभाग जेएंडके