कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. कर्ण सिंह ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के कई प्रावधानों को समाप्त करने के केंद्र सरकार के फैसले का पार्टी लाइन के विपरीत जाकर आंशिक रूप से समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के इस फैसले की पूर्ण रूप से निंदा करना सही नहीं होगा। इस फैसले में कई सकारात्मक बातें हैं।
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कर्ण सिंह
- फोटो : @doctorkaransingh
पूर्व सदर-ए-रियासत ने कहा कि सरकार के फैसले में जो सकारात्मक बातें हैं उनमें लद्दाख के लिए केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा,अनुच्छेद 35 ए को खत्म करना, जम्मू-कश्मीर राज्य के विभाजन के परिणाम स्वरूप भावी परिसीमन शामिल है। नया परिसीमीन पहली बार, जम्मू और कश्मीर क्षेत्रों के बीच राजनीतिक शक्ति का सुनिश्चित और निष्पक्ष विभाजन करेगा।
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उन्होंने अनुच्छेद 370 पर सीधे टिप्पणी नहीं की और हिरासत में लिए गए जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों के नेताओं को रिहा करने और उनके साथ व्यापक आधार पर बाचतीच शुरू करने का आह्वान किया। डॉ. सिंह ने कहा, मुझे यह स्वीकार करना होगा कि संसद में तेजी से लिए गए निर्णयों से हम सभी हैरान रह गए। ऐसा लगता है कि इस बहुत बड़े कदम को जम्मू और लद्दाख सहित पूरे देश में भरपूर समर्थन मिला है।
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सिंह ने कहा निजी तौर पर मैं इस घटनाक्रम की पूरी तरह निंदा किए जाने से सहमत नहीं हूं। इसमें कई सकारात्मक बिंदु हैं। लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने का फैसला स्वागत योग्य है। दरअसल सदर-ए- रियासत रहते हुए मैंने वर्ष 1965 में इसका सुझाव दिया था। अनुच्छेद 35-ए में स्त्री-पुरुष का भेदभाव था उसे दूर किए जाने की जरूरत थी और साथ ही पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थियों को मतदान का अधिकार मिलना और अनुसूचित जाति को आरक्षण की पुरानी मांग का पूरा होना स्वागत योग्य है।
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महाराजा हरि सिंह के बेटे डॉ. कर्ण सिंह ने कहा कि कश्मीर के लोग इस निर्णय से अपमानित महसूस कर रहे होंगे। मेरा मानना है कि इस संदर्भ में राजनीतिक संवाद जारी रहना जरूरी है।