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जम्मू-कश्मीर: बाजार में ताजे आलू की कमी, बनी में तैयार हुई आलू की बंपर पैदावार
Thu, 03 Jun 2021 10:33 PM IST
करिश्मा चिब
पंकज मिश्रा, कठुआ, जम्मू-कश्मीर
पंकज मिश्रा, कठुआ, जम्मू-कश्मीर
Published by: करिश्मा चिब
Updated Thu, 03 Jun 2021 10:33 PM IST
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आलू की फसल
- फोटो : अमर उजाला
दो साल बाद किसानों को कुफरी हिमालयी और कुफरी ज्योति किस्म के बीज कृषि विभाग की ओर से मुहैया करवाए गए थे। लगभग दो महीने के भीतर ही बनी सब डिवीजन के कई हिस्सो में आलू की फसल तैयार हो गई है। जिसे लेकर किसान खासे उत्साहित हैं। मैदानी इलाकों में फिलहाल आलू की ताजा फसल आने में समय लगेगा, ऐसे में बनी क्षेत्र से आने वाले आलू की बाजार में मांग बढ़ना शुरू हो गई है। दरअसल, बनी सब डिवीजन में प्रायोगिक तौर पर इन दो नई किस्म के बीज लगभग 250 किसानों को कृषि विभाग के प्रयासों से उपलब्ध करवाए गए थे। मुख्य कृषि अधिकारी विजय कुमार उपाध्याय ने पंजाब विश्व विद्यालय सहित विभाग के आला अधिकारियों से क्षेत्र के लिए विशेष तौर पर लगभग 140 क्विंटल बीज मुहैया करवाया था। बैकन क्षेत्र से आलू तैयार होकर बाजार में उतार दिया गया है। जिसके किसानों को अच्छे दाम भी मिल रहे हैं। किसानों ने बताया कि फिलहाल बनी क्षेत्र में ही आलू की मांग को पूरा किया जा रहा है। जिसके बाद निचले इलाकों में भेजा जाएगा।
आलू की कमी
- फोटो : सोशल मीडिया
साफ है कि आलू की नई किस्म के बीज इस बार बनी के किसानों को मालामाल करने जा रहे हैं। जिले की पहाड़ी सब डिवीजन बनी में दो हजार से अधिक किसान हर साल व्यवसायिक और व्यक्तिगत तौर पर आलू की खेती करते हैं। कृषि विभाग ने किसानों की मांग और क्षेत्र की जलवायु को ध्यान में रखते हुए बनी सब डिवीजन में पहले बार कुफरी ज्योति किस्म के आलू के बीज मार्च के अंत में उपलब्ध करवाए थे।
आलू की फसल
- फोटो : अमर उजाला
ढग्गर, लोआंग और डुग्गन के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी किसानों ने इस आलू को प्राथमिकता दी है। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी पैदावार स्थानीय बीज से अधिक होने के साथ साथ इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता भी अधिक है। ऐसे में किसानों को पहाड़ी लाल आलू के दाम और पैदावार भी इस बार कई गुणा अधिक मिलने की उम्मीद है।
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आलू की फसल
- फोटो : amar ujala
बनी में 15 सौ क्विंटल तक होती है पैदावार
बनी सब डिवीजन में वार्षिक स्तर पर 15 सौ क्विंटल तक आलू की पैदावार होती है। दो हजार से अधिक किसान इसे व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए लगाते हैं। खास तौर पर सरथल, अपर कांथल, दौले और जोड़ेयां माता के नजदीक कई किसान व्यवसायिक तौर पर आलू की खेती करते हैं जिसकी भारी मांग रहती है।
बनी सब डिवीजन में वार्षिक स्तर पर 15 सौ क्विंटल तक आलू की पैदावार होती है। दो हजार से अधिक किसान इसे व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए लगाते हैं। खास तौर पर सरथल, अपर कांथल, दौले और जोड़ेयां माता के नजदीक कई किसान व्यवसायिक तौर पर आलू की खेती करते हैं जिसकी भारी मांग रहती है।
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आलू
- फोटो : पिक्साबे
सब डिवीजन में फरवरी और अप्रैल में दो सीजन में आलू लगाए जाते हैं। एक फसल जून में तो दूसरी सितंबर और अक्टूबर के लगभग तैयार होती है। दोनों ही समय पर आलू की भारी मांग रहती है। पहाड़ों पर गर्मी के सीजन में कच्ची रिहायशों में रहने वाले लोग आसपास के खेतों में इसे बड़े पैमाने पर उगाते रहे हैं।
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