जम्मू-कश्मीर में विकास और शांति के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा आतंकवाद है। अनुच्छेद-370 के खात्मे और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन एक्ट लागू होने के दो साल के भीतर आतंकवाद पर लगाम लगी है। टारगेट किलिंग आतंकियों की हताशा और टूटी कमर की निशानी है। लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन, इन सभी आतंकी संगठनों के बड़े आतंकी मारे जा चुके हैं। स्थानीय युवाओं को बरगलाकर बंदूक थमाने वालों पर कानून का चाबुक चल रहा है। सीमा पार से फंडिंग के जरिए घाटी में जहर घोलने वाले अब दिखाई नहीं देते हैं। कई बड़े अलगाववादी नेता सलाखों के पीछे हैं। स्थानीय युवा भी अलगाववादियों की सोच और साजिश को समझ चुके हैं।
अब घाटी के लोग भी अलगाववादियों की सोच का समर्थन नहीं कर रहे हैं। वह भी अपने बच्चों को बताते हैं कि किस तरह अलगाववादियों ने खुद की औलादों को अपने से दूर रखकर स्थानीय युवाओं को बरगलाया। अब आपको बताते हैं उन आतंकियों के खात्मे के बारे में, जिसके चलते घाटी में आतंकवाद खात्मे की कगार पर पहुंच चुका है। आतंकियों के खिलाफ चलाए गए ये ऑपरेशन बेहद कठिन थे। एक ऑपरेशन के दौरान तो सुरक्षाबलों को रेलवे ट्रैक भी खोदना पड़ा था।
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सुरक्षाबल
- फोटो : अमर उजाला
बेगपोरा में चलाए गए ऑपरेशन में हिजबुल मुजाहिदीन के टॉप रियाज नायकू को सुरक्षाबलों ने ढेर किया था। रियाज नायकू साथियों के साथ अपनी मां से मिलने बेगपोरा स्थित अपने गांव आया था। इसके बाद सुरक्षाबलों ने पुख्ता रणनीति तैयार कर उसके गांव को पूरी तरह घेर लिया। रियाज पहले भी कई मौकों पर सुरक्षाबलों को गच्चा देकर बच निकला था। इस बार सुरक्षाबल उसे कोई मौका नहीं देना चाहते थे।
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सुरक्षाबलों के पास पुख्ता सूचना थी कि रियाज यहां छिपने के लिए जमीन के अंदर बनाए गए अज्ञात ठिकानों और सुरंगों में शरण लेता है। इसलिए उन्होंने गांव में आतंकी ठिकाने या सुरंग की तलाश में रेलवे ट्रैक और सेब के बागों की जेसीबी से खुदाई शुरू कर दी। इसके साथ ही घर-घर तलाशी अभियान भी शुरू कर दिया।
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सुरक्षाबल पूरे ऑपरेशन के दौरान इस बात का भी ध्यान रख रहे थे कि आम नागरिकों को इससे किसी तरह का नुकसान न पहुंचे। जहां एक ओर रेलवे ट्रैक और सेब के बागों में खोदाई हो रही थी वहीं सुरक्षाबलों ने उस ठिकाने का भी पता लगा लिया जहां हिजबुल कमांडर के छिपे होने की आशंका थी। सुरक्षाबलों ने रात दो बजे उस मकान के आसपास के 16 घरों से वहां रहने वालों को निकालकर सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया। फिर सुरक्षाबलों ने नायकू के खात्मे की कार्रवाई शुरू कर दी। चिह्नित मकान को घेरते ही सुबह नौ बजे दोनों तरफ से फायरिंग शुरू हो गई। सुरक्षाबलों ने आईईडी लगाकर मकान को उड़ा दिया, जहां से दो शव बरामद किए गए, जिसमें रियाज नायकू मारा गया। रियाज के मारे जाने के बाद घाटी में हिजबुल की कमर टूट गई।
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इसके साथ ही जुनैद सेहरई, उमर फ्य्याज उर्फ हमाद खान, जहांगीर, वसीम अहमद वानी, मसूद भट, अंसार गजवात-उल-हिंद का बुरहान कोका, लश्कर-ए-तैयबा का बशीर कोका, इशफाक रशीद, सज्जाद अहमद मीर उर्फ हैदर, नसरुद्दीन लोन, जाहिद नजीर भट, सैफुल्लाह, जैश का सज्जाद अहमद डार, सज्जाद नवाबी, कारी यासिर और पाकिस्तानी आईईडी एक्सपर्ट अबू रहमान, अबू दाशिन और अल बद्र का शकूर पर्रे का मारा जाना भी सुरक्षाबलों के लिए बड़ी कामयाबी रही और घाटी में अमन बहाली हुई।