डल झील के पानी पर तैरते खूबसूरत शिकारे, गुलमर्ग की हंसी वादियां और कबूतरों की गुटरगूं से गुलजार रहने वाली घाटी में इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है। चिनार वैसा ही खूबसूरत है, डल झील भी उतनी ही सुंदर, कबूतर आज भी झुंड में गुटरगूं करते सुनाई देते हैं, बजाय इन सबके सन्नाटा पसरा हुआ है।
अपनी खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध डल झील सूनी पड़ी है। अब यहां कोई पर्यटक नहीं दिखाई देता। शिकारे तो वैसे ही हैं पर उनके अंदर खामोशी बसी हुई है। गुलमर्ग भी सन्नाटे से पसरा हुआ है। कश्मीर का सबसे बड़ा शहर और राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर, जोकि अपनी विशिष्टताओं और खूबसूरती के लिए पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र है, वह भी इन दिनों सूना पड़ा है। दरिया झेलम के दोनों किनारों पर खामोशी छाई है। इन सबकी वजह है कोरोना वायरस।
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जम्मू-कश्मीर में कोरोना कर्फ्यू
- फोटो : बासित जरगर
बता दें कि जम्मू-कश्मीर में कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। संक्रमण से प्रदेश का कोई भी जिला अछूता नहीं है। इतना ही नहीं दूूसरी लहर गांवों में तेजी से लोगों को संक्रमित कर रही है। जम्मू संभाग में शहरों के साथ सटे ग्रामीण इलाके कोरोना संक्रमण की गिरफ्त में आते जा रहे हैं।
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जम्मू-कश्मीर में कोरोना कर्फ्यू
- फोटो : बासित जरगर
प्रतिदिन जम्मू संभाग में मिल रहे कुल मरीजों में से करीब 35 मरीज फीसदी उप नगरीय क्षेत्रों से आ रहे हैं। वहीं वो गांव जो शहरों से कुछ ज्यादा दूरी पर हैं, वहां से भी पांच फीसदी मरीज मिलने शुरू हो चुके हैं। हालांकि, मरीजों का 60 फीसदी हिस्सा अभी भी शहरी इलाकों से ही है।
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जम्मू-कश्मीर में कोरोना कर्फ्यू
- फोटो : बासित जरगर
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार जम्मू संभाग से प्रतिदिन 1500 से 1700 के बीच मामले आ रहे हैं। इनमें औसतन एक हजार से ज्यादा मामले शहरी क्षेत्रों से ही हैं। वहीं 400 के करीब मामले शहरों से सटे गांवों से आ रहे हैं। करीब 90 से 100 तक मामले दूर दराज के गांवों से भी आना शुरू हो चुके हैं।
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जम्मू-कश्मीर में कोरोना कर्फ्यू
- फोटो : बासित जरगर
पुंछ के दूरदराज के क्षेत्र मेंढर से लेकर डोडा व किश्तवाड़ के गांवों से भी संक्रमित मरीज मिल रहे हैं। आशंका है कि शहरों में कामकाज करने वाले लोगों के माध्यम से ही कोरोना गांवों में प्रवेश कर रहा है।