जम्मू कश्मीर के भारत में विलय के लिए मनाए जाने वाले विलय दिवस पर बुधवार को बिग्रेडियर राजिंदर सिंह स्मारक पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। जम्मू-कश्मीर एक्स सर्विस लीग की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। विलय दिवस के साथ ही राजिंदर सिंह का बलिदान दिवस भी मनाया जाता है।
विलय दिवस: 5 हजार दुश्मन, 100 सैनिक, पांच दिन तक मैदान में डटे रहे बिग्रेडियर राजिंदर सिंह
जम्मू कश्मीर के भारत में विलय के लिए मनाए जाने वाले विलय दिवस पर बुधवार को बिग्रेडियर राजिंदर सिंह स्मारक पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। विलय दिवस के साथ ही राजिंदर सिंह का बलिदान दिवस भी मनाया जाता है।
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कौन थे बिग्रेडियर राजिंदर सिंह
बिग्रेडियर राजिंदर सिंह, जम्मू कश्मीर के महाराजा हरि सिंह की फौज के ब्रिगेडियर थे । महावीर चक्र विजेता राजेंद्र सिंह भारतीय सेना के प्रेरणा स्रोत हैं। राजिंदर सिंह ने आखिरी सांस तक दुश्मन को कश्मीर के उड़ी में रोककर देश से जम्मू कश्मीर के विलय को संभव बनाने में अहम योगदान दिया था। वह एक कुशल सैन्य रणनीतिकार थे।
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75 साल पहले पाकिस्तान ने कबाइलियों की आड़ में 22 अक्तूबर 1947 को ऑपरेशन गुलमर्ग के तहत कश्मीर कब्जाने के लिए हमला बोल दिया था। उस वक्त वह महाराजा हरि सिंह की फौज के चीफ ऑफ स्टाफ थे। 100 सैनिकों की टुकड़ी के साथ उन्होंने पांच दुश्मनों को रोकने के लिए उड़ी में मोर्चा संभाला। पांच दिन तक दुश्मन को रोकने वाले ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह 26 अक्तूबर को अपने साथियों को साथ वीरगति प्राप्त हो गए।
27 अक्तूबर को भारतीय सेना पहुंची कश्मीर
इसके बाद भारतीय सेना 27 अक्तूबर को कश्मीर पहुंच गई थी। जम्मू-कश्मीर एक्स सर्विस लीग के इस कार्यक्रम एडीजीपी जम्मू मुकेश सिंह, मंडलायुक्त जम्मू रमेश कुमार, सेना की सोलह कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह, सेना की 9 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह के साथ 26 डिव के जीओसी मेजर जनरल नीरज गोसाई समेत कई अधिकारी मौजूद रहेंगे।
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जम्मू-कश्मीर एक्स सर्विस लीग के पूर्व प्रधान मेजर जनरल गोवर्धन सिंह जम्वाल ने बताया कि महावीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह ने अपने सत्तर सैनिकों के साथ वीरगति पाई थी। उन्हें उस समय का सबसे सर्वोच्च सम्मान महावीर चक्र दिया गया। इधर 26 अक्तूबर 1947 की रात को ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह शहीद हुए, उधर अगले दिन सुबह पांच बजे सेना की एक सिख बटालियन की दो कंपनियां वायुसेना के विमान से लेफ्टिनेंट कर्नल दीवान रंजीत के नेतृत्व में श्रीनगर पहुंच गईं।