कश्मीर में एलओसी पर उड़ी सेक्टर में सेना ने पाकिस्तानी आतंकी को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आतंकी की पहचान बाबर के रूप में हुई है। उसके पास से एक एके-47 राइफल, दो ग्रेनेड एक रेडियो सेट बरामद हुआ है। पूछताछ के दौरान आतंकी द्वारा किए गए खुलासों ने एक बार फिर पाकिस्तान को बेनकाब कर दिया है।
आतंकवादी अली बाबर ने पूछताछ में खुलासा किया है कि उसके छह आतंकवादियों का समूह मुख्य रूप से पाकिस्तानी पंजाब का था। उसने कहा कि गरीबी के कारण उसे गुमराह किया गया। इसके बाद लश्कर-ए-तैयबा में शामिल होने के लिए लालच दिया गया। मां के इलाज के लिए 20 हजार रुपये आतंकियों की ओर से दिए गए। साथ ही 30 हजार रुपये देने का वादा भी किया गया। हथियार चलाने का प्रशिक्षण देने वालों में अधिकांश पाकिस्तानी सेना के जवान थे। आतंकी ने बताया कि उसे इस्लाम और मुसलमान के नाम पर उकसाया गया, साथ ही आतंकवादी बनने पर मजबूर किया गया।
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आतंकियों के पास से बरामद हथियार
- फोटो : अमर उजाला
उड़ी ऑपरेशन के बारे में मेजर जनरल वीरेंद्र वत्स जीओसी, 19 डिविजन ने बताया कि एलओसी पर नौ दिनों तक आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाया गया। आतंकी घुसपैठ की जानकारी मिलने पर यह ऑपरेशन 18 सितंबर को शुरू किया गया था।
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आतंकियों के पास से बरामद हथियार
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इस दौरान आतंकियों से मुठभेड़ हुई। दो आतंकी भारतीय सीमा में थे जबकि चार आतंकी सीमा पार थे। जवाबी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की तरफ के चार आतंकी वापस चले गए।
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बताया कि सीमा में घुसपैठ करने वाले दो आतंकवादियों को घेरने के लिए सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभाला। 25 सितंबर को एक मुठभेड़ हुई, जिसमें एक आतंकवादी को मार गिराया गया, जबकि दूसरा पकड़ा गया। जिसने अपना नाम अली बाबर बताया है।
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आतंकी ने स्वीकार किया है कि वह लश्कर-ए-तैयबा का दहशतगर्द है और मुजफ्फराबाद में प्रशिक्षित किया गया था। साथ ही बताया कि उकसाने और आतंकी बनाने के लिए उससे कहा जाता था कि इस्लाम खतरे में है, मुसलमानों पर अत्याचार हो रहा है।