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खानाबदोशों से आबाद हुई भद्रवाह घाटी, हजारों भेड़-बकरियों और घोड़ों के साथ पहुंचे 450 परिवार

Tue, 12 May 2020 11:43 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 12 May 2020 11:43 AM IST
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450 families arrived in the Bhadarwah valley, with thousands of flocks and horses
भद्रवाह घाटी - फोटो : सोशल मीडिया

लॉकडाउन के बीच डोडा जिले का ऊंचाई वाला इलाका आजकल आदिवासी खानाबदोशों के पहुंचने से आबाद हो गया है। यहां इस समय 450 बक्करवाल परिवार पशुओं के साथ गर्मियां बिताने के लिए पहुंच चुके हैं। यह सभी पिछले एक सप्ताह के दौरान लगभग साढ़े 14 हजार फुट की बर्फ से ढंकी चोटियों को पारकर कठुआ और पड़ोसी राज्य पंजाब के विभिन्न इलाकों से चिनाब घाटी में पैदल दाखिल हुए।

450 families arrived in the Bhadarwah valley, with thousands of flocks and horses
भद्रवाह घाटी - फोटो : सोशल मीडिया

आमतौर पर बक्करवालों का गर्मियों के मौसम में पहाड़ों पर जाने का सिलसिला मार्च-अप्रैल में शुरू हो जाता है। इस बार कोरोना महामारी के चलते यह दो माह देरी से हो रहा है। लॉकडाउन के कारण जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने बक्करवालों के लिए पास भी जारी किए हैं, ताकि इन्हें एक से दूसरी जगह जाने में किसी प्रकार की दिक्कत न हो। वैसे परंपरा के तौर पर स्थानीय लोग इन खानाबदोश लोगों का स्वागत करते थे परंतु इस बार स्थिति थोड़ी सी भिन्न है।

450 families arrived in the Bhadarwah valley, with thousands of flocks and horses
भद्रवाह घाटी - फोटो : सोशल मीडिया

लोगों को आशंका है कि कुछ लोग कोरोना वायरस के संवाहक हो सकते हैं। क्योंकि यह नीचे मैदानी इलाकों से आए हैं और पूरी चिनाब घाटी में इनका आशियाना रहेगा। स्थानीय लोगों की आशंकाओं को देखते हुए डोडा और किश्तवाड़ जिला प्रशासन ने कई उपाय किए हैं जिसमें सभी खानाबदोशों की स्क्रीनिंग के लिए कई विशेष स्वास्थ्य सुविधाएं स्थापित करना शामिल हैं। डोडा और किश्तवाड़ के जुड़वां जिलों में यह लोग या तो सड़कों से गुजरते हैं या पहाड़ों से पार कर भद्रवाह घाटी में प्रवेश करते हैं।

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450 families arrived in the Bhadarwah valley, with thousands of flocks and horses
भद्रवाह घाटी - फोटो : सोशल मीडिया

डोडा के जिला विकास अधिकारी सागर दत्ता डोईफोड का कहना है कि हमने पुलिस और सेना के अलावा हमने विशेषरूप से वन विभाग को लगाया है, जिन्हें परंपरागत रूप से चतरा-गल्ला पास, कैलाश सहित वन क्षेत्र में परंपरागत रूप से उपयोग किए जाने वाले सभी प्रवेश मार्गं पर चौबीस घंटे कड़ी निगरानी रखने के लिए कहा गया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, गर्मियों के महीने में हर साल बक्करवालों और गुज्जरों के हजारों खानाबदोश परिवार, जानवरों के झुंड के साथ, चिनाब घाटी के ऊंचाई वाले मैदानी क्षेत्रों में आते हैं।

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450 families arrived in the Bhadarwah valley, with thousands of flocks and horses
भद्रवाह घाटी - फोटो : सोशल मीडिया

सर्दियों के मौसम से पहले अक्टूबर में यह सभी खानाबदोश समुदाय के लोग जम्मू समेत कम ठंड वाले जिलों में लौटना शुरू कर देते हैं। हालांकि, खानाबदोशों ने कहा कि वे कोरोनो वायरस के खतरे से पूरी तरह परिचित हैं और समय-समय पर सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन कर रहे हैं। भद्रवाह के जोई मीडो पहुंचे 70 साल के शराफत दीन कठुआ जिले के बठिंडी गांव से आए हैं, वह बताते हैं कि वह बर्फ के बीच से गुजरकर पशुओं के साथ यहां पैदल पहुंचे हैं। वनविभाग और डॉक्टरों द्वारा दी गई सलाह का सावधानी से पालन कर रहे हैं।

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