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Politics: वसुंधरा को हाशिए पर रखने की रणनीति क्या खा गई मात? देवदर्शन यात्रा में उमड़ी भीड़ देखकर विरोधी हैरान

Mon, 17 Oct 2022 06:15 PM IST
Harishchandra singh Singh हरिश्चंद्र सिंह
Updated Mon, 17 Oct 2022 06:15 PM IST
सार

राजस्थान की सत्ता से दूर हुए बीजेपी को चार साल का समय पूरा होने जा रहा है। करीब इतना ही समय पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को प्रदेश की राजनीति में हाशिए पर रहते हुए हो गया है। 

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What was BJP strategy to marginalize Vasundhara Opponents surprised to see crowd in Devdarshan Yatra
देवदर्शन यात्रा में उमड़ी भीड़ देखकर विरोधी हैरान - फोटो : अमर उजाला

राजस्थान की सत्ता से दूर हुए बीजेपी को चार साल का समय पूरा होने जा रहा है। करीब इतना ही समय पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को प्रदेश की राजनीति में हाशिए पर रहते हुए हो गया है। लेकिन, खबर है कि हाल में देवदर्शन यात्रा के जरिए राजे ने जो हुंकार भरी, उससे बीजेपी में उनके विरोधी खेमे की नींद उड़ गई है।

What was BJP strategy to marginalize Vasundhara Opponents surprised to see crowd in Devdarshan Yatra
देवदर्शन यात्रा में उमड़ी भीड़ - फोटो : अमर उजाला

वसुंधरा राजे ने हाल ही में अपने बीकानेर दौर में चार जनसभाएं कीं। सभाओं में उमड़ी भीड़ उनके विरोधियों को परेशान करने वाली साबित हुई। विरोधी इस बात से हैरान हैं कि चार साल तक पार्टी के कैडर से दूर रहने के बाद भी राजे के समर्थन में पार्टी के विचारधारा से जुड़े चेहरे खुले में नजर आ रहे हैं। अब राजे विरोधी अपनी इस बड़ी चूक को सुधारने की कवायद में लगे हैं।

What was BJP strategy to marginalize Vasundhara Opponents surprised to see crowd in Devdarshan Yatra
वसुंधरा को हाशिए पर रखने की रणनीति क्या खा गई मात - फोटो : अमर उजाला

दरअसल, साल 2018 में चुनाव में हार का मुंह दिखाने में बीजेपी की अंदरूनी गुटबाजी और शह मात के खेल की बड़ी भूमिका थी। चुनाव में हार के साथ ही बीजेपी के केन्द्रीय नेतृत्व ने वसुंधरा को दरकिनार कर दिया। हालांकि, उनके नाम का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर रखा गया, लेकिन राजस्थान संबंधी बीजेपी के निर्णयों में उनकी कोई भूमिका नहीं रखी गई। यही व्यवहार राजे समर्थक नेताओं के साथ प्रदेश बीजेपी की कमान संभाले बैठे नेताओं का रहा।

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वसुंधरा का देवदर्शन यात्रा - फोटो : अमर उजाला

यहीं प्रदेश के नेताओं की रणनीतिक चूक रही। आज पार्टी के बाहर और पार्टी के अंदर चार साल से चुप्पी लगाए बैठे यही नेता अब राजे के लिए पॉवर बैकअप बन रहे हैं। यही नेता राजे के दौरों में भीड़ जुटाने से लेकर अन्य तरह के प्रबंधन का काम कर रहे हैं। उसके पीछे की वजह इन नेताओं को खुद के राजनीतिक वजूद को बनाए रखना है। क्योंकि अगला साल प्रदेश में विधानसभा चुनाव का है। इसलिए बीजेपी के विचारों से जुड़े यह नेता वसुंधरा को मजबूती देने में अपना राजनीतिक भविष्य तलाश रहे हैं।

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वसुंधरा की देवदर्शन यात्रा में उमड़ी भीड़ - फोटो : अमर उजाला

बीजेपी में वसुंधरा राजे विरोधी गुट मान कर चल रहा है कि राजस्थान की 200 विधानसभाओं में पूर्व मुख्यमंत्री समर्थकों की टीम मौजूद है। यह वही लोग हैं, जिन्हें पार्टी ने हाशिए पर डाल रखा था।

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