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राजस्थान: आसाराम की पैरोल पर हाईकोर्ट सख्त, 20 दिन की रिहाई के आदेश का पालन करने का सरकार को निर्देश
Tue, 06 Oct 2026 08:13 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Tue, 06 Oct 2026 08:13 PM IST
सार
राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी आसाराम को 20 दिनों की पैरोल पर रिहा करने के पूर्व आदेश का पालन करने का राज्य सरकार को निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार की दलीलें खारिज करते हुए अनुपालना रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
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राजस्थान हाईकोर्ट -फोटो अमर उजाला
विस्तार
राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी आसाराम को 20 दिनों की पैरोल पर रिहा करने के पूर्व में जारी आदेश का अनुपालन करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। अदालत ने इस संबंध में सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए अनुपालना रिपोर्ट पेश करने का आदेश जारी किया।
याचिका पर सुनवाई
जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ के समक्ष आसाराम की ओर से याचिका दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि अदालत द्वारा अगस्त महीने में दी गई पैरोल के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है। मामले की सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने सरकार को आदेश दिया कि आसाराम को पैरोल पर रिहा किया जाए और उसकी अनुपालना रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए। सुनवाई के दौरान आसाराम के वकीलों ने कहा कि 3 अगस्त को अदालत ने 20 दिनों की पैरोल मंजूर की थी, लेकिन राज्य सरकार ने उन्हें रिहा नहीं किया।
सरकार की दलीलें खारिज
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता बीएल भाटी ने दलील दी कि आसाराम को गुजरात के गांधीनगर की अदालत ने भी दोषी माना है, जहां के हाईकोर्ट ने उसकी पैरोल याचिका खारिज कर दी थी। खंडपीठ ने इस दलील पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार ऐसा कोई कानूनी कारण पेश नहीं कर सकी, जिससे 3 अगस्त के आदेश को रद्द या निलंबित माना जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि इस अदालत द्वारा जारी आदेश पर गुजरात हाईकोर्ट द्वारा आपातकालीन पैरोल खारिज किए जाने के फैसले का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है।
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सर्वोच्च अदालत में चुनौती नहीं
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने सरकार के अधिवक्ता से पूछा कि क्या सरकार ने तीन अगस्त के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिससे यह आदेश निरस्त या निलंबित हो सके। इस पर अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि सरकार की ओर से ऐसी कोई याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर नहीं की गई है। इस पर खंडपीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति में तीन अगस्त को जारी आदेश का पालन अनिवार्य रूप से होना चाहिए।
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नाबालिग से दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न का दोषी
जोधपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने साल 2018 में नाबालिग से दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराते हुए आसाराम को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद से ही आसाराम लंबे समय से जेल में बंद है। स्वास्थ्य संबंधी कारणों से अदालत ने उसे कई बार अस्पताल जाने की अनुमति दी थी। इसी दौरान 3 अगस्त को राजस्थान हाईकोर्ट ने उसकी 20 दिनों की पैरोल मंजूर की थी। इसके अलावा, सूरत की दो बहनों द्वारा दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न के मामले में भी जनवरी 2023 में गांधीनगर की अदालत ने आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
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याचिका पर सुनवाई
जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ के समक्ष आसाराम की ओर से याचिका दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि अदालत द्वारा अगस्त महीने में दी गई पैरोल के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है। मामले की सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने सरकार को आदेश दिया कि आसाराम को पैरोल पर रिहा किया जाए और उसकी अनुपालना रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए। सुनवाई के दौरान आसाराम के वकीलों ने कहा कि 3 अगस्त को अदालत ने 20 दिनों की पैरोल मंजूर की थी, लेकिन राज्य सरकार ने उन्हें रिहा नहीं किया।
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सरकार की दलीलें खारिज
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता बीएल भाटी ने दलील दी कि आसाराम को गुजरात के गांधीनगर की अदालत ने भी दोषी माना है, जहां के हाईकोर्ट ने उसकी पैरोल याचिका खारिज कर दी थी। खंडपीठ ने इस दलील पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार ऐसा कोई कानूनी कारण पेश नहीं कर सकी, जिससे 3 अगस्त के आदेश को रद्द या निलंबित माना जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि इस अदालत द्वारा जारी आदेश पर गुजरात हाईकोर्ट द्वारा आपातकालीन पैरोल खारिज किए जाने के फैसले का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है।
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सर्वोच्च अदालत में चुनौती नहीं
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने सरकार के अधिवक्ता से पूछा कि क्या सरकार ने तीन अगस्त के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिससे यह आदेश निरस्त या निलंबित हो सके। इस पर अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि सरकार की ओर से ऐसी कोई याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर नहीं की गई है। इस पर खंडपीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति में तीन अगस्त को जारी आदेश का पालन अनिवार्य रूप से होना चाहिए।
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नाबालिग से दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न का दोषी
जोधपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने साल 2018 में नाबालिग से दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराते हुए आसाराम को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद से ही आसाराम लंबे समय से जेल में बंद है। स्वास्थ्य संबंधी कारणों से अदालत ने उसे कई बार अस्पताल जाने की अनुमति दी थी। इसी दौरान 3 अगस्त को राजस्थान हाईकोर्ट ने उसकी 20 दिनों की पैरोल मंजूर की थी। इसके अलावा, सूरत की दो बहनों द्वारा दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न के मामले में भी जनवरी 2023 में गांधीनगर की अदालत ने आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।