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तस्वीरों में देखिए भोले के रूप और भक्तों की भक्ति

Mon, 10 Jul 2017 06:02 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Mon, 10 Jul 2017 06:02 PM IST
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These Shiva temples of Rajasthan also have different identity, know why
ताड़केश्वर महादेव मंदिर - फोटो : amar ujala
राजधानी जयपुर में ताड़केश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर काफी फेमस है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां सैकड़ों साल पहले ताड़ के पेड़ों का जंगल था। एक ग्वाले की गाय यहां एक ताड़ के पेड़ के नीचे आती थी तो उसके थनों से स्वत: ही दूध निकलने लगता था। इसी दौरान भगवान भोलेनाथ ने ग्वाले को स्वप्न में दर्शन दिए और शिवलिंग के बारे में बताया। इस पर ग्वाले ने जब जमीन खोदी तो उसमें से शिवलिंग निकला। ताड़ के पेड़ों बहुलता के कारण इस शिव​लिंग का नाम ताड़केश्वर पड़ा। मान्यता है कि इनके दर्शन से काशी विश्वनाथ के दर्शनों का जितना पुण्य मिलता है।

सवाई जयसिंह ने कराया था मंदिर का निर्माण

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ताड़केश्वर महादेव मंदिर - फोटो : amar ujala
ताड़केश्वर महादेव मंदिर का विस्तार जयपुर की स्थापना के बाद हुआ। जयपुर के संस्थापक महाराजा सवाई जयसिंह ने यहां भव्य मंदिर बनवाया। यहां अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी विराजमान है। साथ ही पांच फुट का अष्टधातु से बना शिवजी का वाहन नंदी यहां का मुख्य आकर्षण है। आज यहां मंगला आरती के साथ ही भक्तों की रैलमपेल शुरू हो गई। लंबी कतार में लगे भक्त शिव जी का जलाभिषेक करने के लिए अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। यहां आने वाले भक्तों में मान्यता है कि शिवलिंग का अभिषेक करने के बाद नंदी की प्रतिमा से भी आशीर्वाद लेना चाहिए।
 

झाड़खंड महादेव: अभिषेक करने की होड़

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झाड़खंड महादेव मंदिर - फोटो : amar ujala
जयपुर के खातीपुरा इलाके में स्थित झाड़खंड महादेव मंदिर में भी आज सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। यहां आने वाले भक्तों में महिला भक्तों की संख्या अधिक रही। हर कोई भोलेनाथ का अभिषेक करना चाहता था। कोई दूध से प्रभु को नहला रहा था तो कोई दही और शहद से प्रभु को रिझा रहा था। कहा जाता है कि यहां भी शिवलिंग स्वयंभू है। अपनी हरियाली के लिए आसपास के जयपुर में प्रसिद्ध इस स्थान को बाबा देवीदास और गोविंदनाथ ने लोक पूज्य बनाया। गोविंदनाथ के शिष्यों ने ही इस मंदिर में कई निर्माण कार्य करवाए।
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यहां कैलाश मानसरोवर जैसा नजारा

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घुश्मेश्वर महादेव मंदिर, शिवाड़
जयपुर से करीब सौ किलोमीटर की दूरी पर सवाईमाधोपुर के शिवाड़ में स्थित घुश्मेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही दूर-दराज से आए भक्तों का तांता लगा रहा। कहा जाता है कि जो भक्त कैलाश मानसरोवर की यात्रा नहीं कर सकते उन्हें यहां आने मात्र से कैलाश मानसरोवर की यात्रा का अनुभव होगा।
शिवालय एक ऊंची पहाड़ी पर है जिसे पूरी तहर कैलाश जैसा ही रूप दिया गया है। यहां घुश्मेश्वर मन्दिर परिसर, देवगिरी उद्यान, घुश्मेश्वर उद्यान, शिव सरोवर सहित अमरनाथ गुफा का भी दृश्य बनाया हुआ है। कहा जाता है कि महमूद गजनवी का सेनापति यहां लूटने के इरादे से आया तो उसे यहां सफलता नहीं मिली।
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900 साल पुराना है ये मंदिर

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महाकालेश्वर महादेव मंदिर, उदयपुर - फोटो : amar ujala
उदयपुर का करीब 900 साल से भी पुराना महाकालेश्वर मंदिर में भी आज भक्तों की लाइनें लगी रहीं। बताया जा रहा है जल्द ही यह मंदिर हाइटेक होने जा रहा है। नौ साल पहले तक यह मंदिर महज 16 वर्ग फीट के दायरे तक ही सिमटा था, लेकिन अब यह मंदिर 45 हजार वर्ग फीट परिधि में होने के साथ-साथ श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है। यहां भी जल्द ही महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन की तर्ज पर काल गणना की जाएगी।
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