विवादों से चौतरफा घिरी संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावती' के 1 दिसम्बर को रिलीज होने की उम्मीदों पर एक बार फिर पानी फिर गया है। फिल्मों को सर्टिफिकेट जारी करने वाली संस्था सेंसर बोर्ड यानी केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने अब तक फिल्म नहीं देखी है।
आवेदन पत्र में ही हुई गलती
सेंसर बोर्ड ने तकनीकि कारणों के चलते फिल्म को बिना देखे ही लौटा दिया है। सीबीएफसी द्वारा फिल्म निर्माताओं ने जब पिछले हफ्ते सर्टिफिकेशन के लिए फिल्म भेजी थी, तो उसके लिए आवेदन पत्र ही अधूरा पाया गया। बताया गया है कि फिल्म निर्माता ने आवेदन पत्र के साथ दिए जाने वाले कुछ दस्तावेज भी बोर्ड को नहीं सौंपे, जिसके चलते बोर्ड ने बिना देखे फिल्म लौटा दी।
68 दिनों का दिया जाता है समय
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पद्मावती
- फोटो : SOCIAL MEDIA
सीबीएफसी किसी भी फिल्म को रिलीज करने से पहले प्रमाण पत्र जारी करने के लिए आवदेन पत्र दाखिल करने का 68 दिन का समय देता है। फिल्म देखने से पहले बोर्ड सर्वप्रथम फिल्म के आवदेन पत्र की समीक्षा करता है।
आवेदन के बाद बोर्ड से फिर मिलेगी 'पद्मावती' देखने की तारीख
पद्मावती फिल्म मेकर जब वापस सम्पूर्ण दस्तावेज के साथ आवेदन करेंगे, तब सेंसर बोर्ड उसका परीक्षण करेगा। आवेदन सही पाए जाने पर फिल्म देखेगा। एक तय तिथि पर बोर्ड के सदस्य फिल्म देखते हैं। यदि फिल्म के कुछ सीन में कट की जरूरत होगी, तो फिल्म को पुनः सम्पादन के लिए भेज देगा। यदि सब कुछ सही रहा, तो सर्टिफिकेट जारी कर देगा। फिल्म को चार श्रेणियों में बाटंकर उसको सर्टिफिकेट जारी किया जाता है।
अब सर्टिफिकेट मिलने में हो सकती है देर
अब चूंकि फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा 'पद्मावती' के आवेदन को ही लौटा दिया गया है, तो ऐसे में फिल्म निर्माता से हुई आवेदन पत्र में हुई त्रुटियों को पहले ठीक किया जाएगा। वापस वही प्रकिया होने के कारण फिल्म के सर्टिफिकेट जारी होने में समय लग सकता है।