जयपुर के विद्याधर नगर में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने आज यहां हर किसी की आंखों को नम कर दिया। विधि के विधान के आगे सुख-सुविधाओं सहित तमाम आधुनिक उपकरण बौने साबित हुए। आज का ये दिन मकान मालिक और पेशे से लोहा व्यापारी संजीव गर्ग की जिंदगी में ताउम्र अंधेरा कर गया। उनके पिता सहित पूरा परिवार मकान में सिलेंडर फटने से मौत के मुंह में समा गया। हादसे में गर्ग के परिवार के 5 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई।
सुरक्षा के लिए लगाए उपकरण ही बने जानलेवा
हादसे के बाद सामने आया कि लोहा व्यापारी संजीव गर्ग के इस बंगले में सुरक्षा के सभी उपकरण लगे थे जो हाईटेक भी थे। परंतु टेक्नोलॉजी ने एक बार फिर से काल के आगे घुटने टेक दिए और अंदर 5 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हालांकि, पहले भी ऐसे कई हादसे पेश आए हैं जिनमें कई बार महंगी टेक्नोलॉजी और उपकरण जरूरत पड़ने पर फेल ही हुए हैं।
घर में वुडन फ्लोरिंग होने से ज्यादा भड़की आग
बताया गया है कि संजीव गर्ग के इस मकान में फर्श की जगह वुडन फ्लोर लगे हुए थे जिससे आग ने और भी ज्यादा विकराल रूप ले लिया। मार्बल से ज्यादा महंगी पड़ने वाले वुडन फ्लोर आग लगने पर ज्यादा घातक साबित हो सकती है जिसका उदाहरण आज इस दर्दनाक हादसे में देखने को मिल ही गया।
सेफ्टी अलार्म बजे और आॅटोमैटिक बंद हो गए दरवाजे
जिस तरह महंगी कारों में धुआं उठते ही महंगी कारों के दरवाजे अपने आप बंंद हो जाते हैं ठीक वैसे ही इस घर में भी सिलेंडर ब्लास्ट होते ही फायर अलार्म बज उठा और सेंसर से तुरंत घर के सभी दरवाजे बंद हो गए। मकान में फंसे 5 लोग महंगे सुरक्षा उपकरणों की घटिया टेक्नोलॉजी के कारण किसी तरह भी अपने आप को बचा नहीं पाए और उनका घर ही उनकी चिता बन गया।
पीछे की तरफ था एक रास्ता उस पर भी लगी थी जाली
बताया गया है कि घर के पीछे एक बालकनी बनी हुई थी जिससे घर में मौजूद लोग बाहर जा सकते थे मगर उसे भी पूरा जाली से कवर करा रखा था। ऐसे में यदि कोई जाली को तोड़ने की कोशिश भी करता तो भी नहीं कर पाता क्योंकि आग इस कदर फैली हुई थी कि किसी का बच पाना मुमकिन ही नहीं था।