बीएसएफ के जवान जहां 24 घंटे चौकस रह कर देश की सरहद की रक्षा करते हैं उस जगह को अब सैलानी भी करीब से देख सकेंगे। जी हां, भारत-पाक सीमा से सटे सरहदी जिले जैसलमेर की
अंतरराष्ट्रीय तारबंदी और सीमा चौकी क्षेत्र में बॉर्डर टूरिज्म शुरू करने की योजना पर विचार चल रहा है।
बीएसएफ करेगी पहल
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border tourism
- फोटो : Amar Ujala
सीमा सुरक्षा बल की इस कवायद से स्वर्णनगरी जैसलमेर में टूरिज्म को पंख लगेंगे और सैलानियों के लिए सरहदी जिले में एक ट्यूरिस्ट स्पॉट देखने को मिलेगा। पिछले कई सालों से जैसलमेर में बॉर्डर टूरिज्म की मांग उठ रही थी, लेकिन संवेदनशील मामला होने की वजह से फैसला नहीं हो पा रहा था। अब एक बार फिर इसको लेकर कवायद तेज हो गई है।
पर्यटन के क्षेत्र को लग जाएंगे नए पंख
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tanot mata temple jaisalmer
यदि बॉर्डर टूरिज्म की शुरुआत होती है तो जैसलमेर पर्यटन का ग्राफ तेजी से बढ़ेगा और इस क्षेत्र को नए पंख लग जाएंगे। यहां आने वाले सैलानियों की संख्या में इजाफा होगा और लम्बे समय से पर्यटन के नए क्षेत्र तलाशने का इंतजार भी पूरा हो जाएगा। वहीं दूसरी तरफ जो सैलानी यहां आएंगे, उनके ठहराव में कम से कम एक दिन की बढ़ोतरी होगी, जिसका फायदा पर्यटन व्यवसाय को मिलेगा।
फैंसिंग तक जा सकेंगे सैलानी
गौरतलब है कि लोंगेवाला में आर्मी की ओर से युद्ध स्थल तैयार किया गया है, जहां लाखों की संख्या में सैलानी पहुंच रहे हैं। ऐसे में वाघा बॉर्डर की तर्ज पर जैसलमेर में सीमा क्षेत्र की फेंसिंग तक सैलानियों को पहुंचाने के लिए डिमांड बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से प्रस्ताव या सुझाव मिलता है तो जल्द ही उस पर अमल किया जाएगा।
प्रोजेक्ट विचारधीन
हालांकि अभी तक इस मामले में शुरुआत नहीं हुई है। जानकारी के अनुसार इस पर विचार किया जा रहा है कि सैलानियों को बॉर्डर तक कैसे लाया जाएगा। बीएसएफ के डीजी के.के. शर्मा के अनुसार ऐसा हो सकता है कि दिन में दो या तीन बार बस से सैलानियों को ले जाया जाए सीमा चौकी का भ्रमण करवाया जाए।