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दिल्ली में जिस मामले पर मचा बवाल राजस्थान में भी वही हाल, जानें....

Sat, 20 Jan 2018 11:43 AM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर Updated Sat, 20 Jan 2018 11:43 AM IST
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delhi rajasthan same situation about parliamentary secretary
फाइल फोटो।
दिल्ली में आप के 20 विधायकों की विधायकी किसी भी समय जा सकती है। आॅफिस आॅफ ​प्रॉफिट मामले में चुनाव आयोग ने केजरीवाल के 20 विधायक की सदस्यता निरस्त करने की सिफारिश राष्ट्रपति को भेज दी है। दिल्ली में मचे बवाल के बाद अब उन राज्यों में भी हलचल मच रही है जहां विधायकों को संसदीय सचिव बनाकर लाभ का पद दिया गया है। ऐसे राज्यों में राजस्थान भी सम्मलित है। विशेष बात यह है कि यहां भी संसदीय सचिव की नियुक्ति मामले में हाईकोर्ट में याचिका लगी हुई है। ​

यहां 10 संसदीय सचिव

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वसुंधरा राजे
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर आरोप है कि उन्होंने 20 विधायकों को संसदीय सचिव बनाकर लाभ दिया है। जबकि राजस्थान में भी सरकार ने दस विधायकों को संसदीय सचिव बनाया हुआ। राजस्थान में जो 10 संसदीय सचिव है उनमें लादूराम विश्नोई, सुरेश रावत, विश्वनाथ मेघवाल, जितेन्द्र गोठवाल, भैरा राम चौधरी, नरेन्द्र नागर, भीमा भाई, शत्रुघ्न गौतम व विधायक ओमप्रकाश सम्मलित है। 

हाईकोर्ट में मामला

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फाइल फोटो।
विधायकों को लाभ का पद दिए जाने के सरकार के फैसले को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इस मामले में हाईकोर्ट ने बीते वर्ष नवंबर में राज्य सरकार को नोटिस जारी कर राज्य सरकार से चार दिसंबर तक जवाब भी मांगें थे। लेकिन सरकार की ओर से इस मामले में कोई जवाब पेश नहीं करने पर पहले मामले की सुनवाई 16 जनवरी 2018 और फिर आगामी चार सप्ताह के टाल दी गई है। 
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कांग्रेस भी पीछे नहीं

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फाइल फोटो।
दरअसल राजस्थान में संसदीय सचिव बनाने की परंपरा पुरानी है। पूववर्ती गहलोत सरकार ने भी अपने कार्यकाल में 13 विधायकों को संसदीय सचिव का दर्जा दिया था। जबकि वर्ष 2003 की वसुंधरा सरकार ने भी अपने कार्यकाल में छह संसदीय सचिव बनाए थे। दरअसल राजनीति में पद की महत्वकांक्षा पाले नाराज विधायकों को खुश करने के लिए ये पार्टियां आमजन के पैसे का दुरुपयोग करती है। 
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30 मंत्री और 10 सचिव

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फाइल फोटो।
करीब सात करोड़ की जनसंख्या वाले राजस्थान में भाजपा की सरकार है। वर्ष 2013 में भाजपा ने राजस्थान विधानसभा में रिकॉर्ड 160 सीटें जीती थी। इसके बाद नियमानुसार यहां कुल विधायकों में 15 प्रतिशत को मंत्री बनाया गया था। अब राजस्थान में मुख्यमंत्री सहित 30 मंत्री है। जबकि 10 संसदीय सचिव है। गौरतलब है कि संसदीय सचिवों को राज्य मंत्री का दर्जा मिलता है। जिसके तहत सरकारी बंगला सहित अन्य सुविधाएं इन्हें दी जाती है।   
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