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किसान आंदोलन : हरियाणा में बदल रही रणनीति, खापों के बाद अब 36 बिरादरी पर किसान संगठनों की नजर
Sat, 13 Feb 2021 12:57 PM IST
निवेदिता वर्मा
अंकित चौहान, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
अंकित चौहान, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 13 Feb 2021 12:57 PM IST
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किसान आंदोलन के लिए हरियाणा में बदल रही रणनीति।
- फोटो : फाइल फोटो
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ट्रैक्टर परेड के बाद जिस तरह से किसान आंदोलन में हरियाणा व यूपी की भागीदारी बढ़ी है और खापों के सहारे लगातार महापंचायत हो रही है। उसको देखते हुए ही हरियाणा के लिए आंदोलन की रणनीति में बदलाव किया गया है। अब 36 बिरादरी को जोड़कर आंदोलन में शामिल करने के लिए अभियान शुरू कर दिया गया है। जिसके तहत ही प्रदेश में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व पिछड़ा वर्ग समाज के लोगों के साथ किसान संगठनों के नेता बैठक कर रहे हैं और इस समाज के लोगों की पंचायतों को कराने की योजना तैयार की गई है।
किसान आंदोलन में रागिनी पेश करते कलाकार।
- फोटो : अमर उजाला
इसमें सबसे पहली पंचायत 19 फरवरी को बरवाला में तय की गई है और उसमें किसान संगठनों की ओर से गुरनाम सिंह चढूनी का पहुंचने का कार्यक्रम भी तय हो गया है। उसके बाद अन्य जगहों पर पिछड़ा वर्ग समाज की पंचायतों को कराया जाएगा और उनमें अन्य नेता भी शामिल हो सकते हैं।
धरने पर बैठे किसान टीवी देखते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
कृषि कानून रद्द करने की मांग को लेकर 79 दिन से किसान आंदोलन कर रहे हैं और इस आंदोलन को तेज करने के लिए खूब रणनीति भी बन रही है। ट्रैक्टर परेड के बाद आंदोलन में हरियाणा व यूपी के ज्यादा किसान जरूर जुड़े हैं, लेकिन हरियाणा से अभी तक 36 बिरादरी के लोग आंदोलन में शामिल नहीं होते दिख रहे हैं। किसान संगठनों के नेताओं को इसलिए ही लगता है कि जब तक 36 बिरादरी के नेताओं को आंदोलन में शामिल नहीं किया जाएगा, उस समय तक सरकार पर पूरी तरह से दबाव नहीं बनाया जा सकता है। सरकार पर दबाव बनाने के बाद ही बातचीत के बंद पड़े रास्ते को दोबारा खोला जा सकता है।
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किसान नेता गुरनाम चढ़ूनी।
- फोटो : फाइल फोटो
अब आंदोलन से 36 बिरादरी को जोड़ने के लिए हरियाणा में रणनीति बदली गई है। किसान संगठनों के नेताओं ने अन्य बिरादरी के बीच पहुंचने का अभियान छेड़ दिया है। उसके तहत ही भाकियू हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने पानीपत, हिसार, कैथल, रोहतक, जींद समेत अन्य जिलों के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजति, पिछड़ा वर्ग समाज के लोगों के साथ बैठक की। इन सभी वर्ग के लोगों को बताया जा रहा है कि कृषि कानूनों से केवल किसानों को नुकसान नहीं है, बल्कि कृषि उत्पाद इस्तेमाल करने वाले आम लोगों के लिए भी इन कानूनों से परेशानी होगी।
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किसानों को संबोधित करते गुरनाम सिंह चढूनी।
- फोटो : फाइल फोटो
सरकार ने जिस तरह के कृषि कानून बनाए हैं, उससे केवल किसान ही प्रभावित नहीं होगा। बल्कि उनसे आम लोगों के लिए भी बड़ा नुकसान है और उनको भी कृषि उत्पाद काफी महंगे मिलेंगे। इसलिए ही आंदोलन से हर समाज के लोगों को जोड़ा जा रहा है और उनसे समर्थन मांगा जा रहा है। हालांकि पहले ही हर वर्ग का समर्थन मिल रहा है, लेकिन सरकार का जिस तरह से रवैया है। उसको देखते हुए हर वर्ग के बीच जाएंगे और उनसे समर्थन मांग रहे हैं। बरवाला में पंचायत तय की गई है और वहां हजारों लोगों के आने की बात कही गई है। - गुरनाम सिंह चढूनी, अध्यक्ष, भाकियू हरियाणा