पेरिस ओलंपिक में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन कर अपनी योग्यता का लोहा मनवाते हुए देश को हॉकी में 13वां पदक दिलवाया है। बेशक भारतीय टीम टोक्यो ओलंपिक में मिले पदक का रंग नहीं बदल सकी, उसके बावजूद टीम ने बेहतर प्रदर्शन कर सभी का दिल जीत लिया।
भारतीय टीम की जीत में हरियाणा के सोनीपत जिले के दो खिलाड़ियों की अहम भूमिका रही। गांव कुराड़ के सुमित कुमार ने नौ बार विरोधी टीम को गोल करने से रोका, वहीं मयूर विहार के अभिषेक ने अंतिम पांच मिनट में डिफेंस कर पदक जीत में अहम भूमिका निभाई। भारतीय हॉकी टीम की जीत के बाद गांव कुराड़ और मयूर विहार में परिजनों ने जमकर जश्न मनाया।
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सुमित के घर खुशी मनाते युवा।
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गांव कुराड़ निवासी सुमित कुमार ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने मुकाबले में करीब नौ बार विरोधी टीम को गोल करने से रोका व मौका मिलने पर स्पेन की डी के घुसकर दो बार गोल दागने का प्रयास किया। उन्होंने अपने अनुभव का सही उपयोग करके मिडफील्ड में भी बेहतर प्रदर्शन किया। वहीं मयूर विहार निवासी अभिषेक नैन ने मुकाबले में तीन बार गोल करने का प्रयास किया। अभिषेक नैन ने मुकाबले की शुरुआत में ही बेहतरीन तरीके से बॉल को तीन प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों के बीच से निकाला और डी तक लेकर गए। उनके पास पर ही बॉल स्पेन के खिलाड़ी के पैर पर जा लगी। इसके बाद भारतीय टीम को पेनल्टी काॅर्नर मिला, जिसे भारतीय कप्तान हरमनप्रीत ने गोल में तब्दील किया। भारतीय टीम ने इस गोल के साथ 1-1 से बराबरी की। वहीं अभिषेक ने अंतिम पांच मिनट में डिफेंस किया। टीम की जीत के बाद गांव कुराड़ व मयूर विहार में खिलाड़ियों के घर पर परिजन मिठाई बांटकर खुशी मना रहे हैं।
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सोनीपत के मयूर विहार में मिठाई खिलाकर जीत की खुशी मनाते परिजन।
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अभिषेक की मां सूरत देवी बोलीं- चूरमा खिलाकर बेटे को गले लगाऊंगी
अभिषेक नैन की मां सूरत देवी ने बताया कि पूरे मुकाबले के दौरान धड़कनें बढ़ी हुई थीं। अभिषेक ने मुकाबले से पहले बात की थी। अभिषेक ने बहुत मेहनत की है। वह हमेशा हॉकी ही खेलता रहता था, आज बेटे ने नाम रोशन कर दिया। चूरमा खिलाकर बेटे को गले लगाऊंगी। पिता सत्यनारायण ने बताया कि पूरी टीम बेहतर खेली है। उम्मीद स्वर्ण पदक की थी, लेकिन यह पदक सोने से कम नहीं है।
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कांस्य पदक जीतने के बाद अभिषेक नैन परिजनों से बात करते हुए।
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परिजनों से वीडियो कॉल पर बोले अभिषेक- जिंदगी से जो चाहिए था, वह मिल गया
अभिषेक नैन ने मुकाबला जीतने के बाद परिजनों से वीडियो कॉल पर कहा कि पदक जीतकर बेहद खुश हूं, जिंदगी से जो चाहिए था, वह मिल गया है। इस लम्हे को शब्दों में बयां नहीं कर सकता। उन्होंने ओलंपिक कांस्य पदक अपने गुरु शमशेर सिंह को समर्पित किया है। प्रधानमंत्री से मिलने जाएंगे तो चूरमा लेकर जाएंगे। सुमित की जीत पर ओमैक्स सिटी में उनके आवास पर जमकर आतिशबाजी की गई। ढोल की थाप पर परिजनों ने जश्न मनाया।
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मुकाबले के दौरान उत्साहित सुमित कुमार के भाई जयसिंह व अन्य।
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भाई जयसिंह बोले- सुमित ने गर्व से सीना चौड़ा कर दिया
सुमित के भाई जयसिंह ने भावुक होते हुए कहा कि सुमित ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। सुमित ने गर्व से सीना चौड़ा कर दिया है। सुबह से ही टीम की जीत के लिए व्रत रख रखा था। यह कांस्य पदक सोने से भी बेहतर है। गांव कुराड़ में सुमित के लौटने पर जोरदार स्वागत किया जाएगा।