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Haryana: सोनीपत में देश का पहला संविधान संग्रहालय, स्वतंत्रता पूर्व भारत की दिखा रहा झलकियां

Sat, 23 Nov 2024 11:55 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sat, 23 Nov 2024 11:55 PM IST
सार

आगंतुक दृश्य अनुभव के माध्यम से स्वतंत्रता से पहले के भारत की ध्वनियों में डूब सकते हैं। संविधान निर्मात्री सभा के सभी 300 सदस्यों की मूर्तियां भी लगाई गईं हैं।

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Haryana: Country's first Constitution Museum in Sonipat, showing glimpses of pre-independence India
संविधान किताब को देखते कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल। - फोटो : संवाद

हरियाणा के सोनीपत में ओपी जिंदल ग्लोबल विश्वविद्यालय, जगदीशपुर में खोला गया देश का पहला संविधान संग्रहालय अनूठी कृत्रिम विधा (एआई) तकनीक से बनाया है। संग्रहालय देश के संविधान के महत्वपूर्ण तत्वों व प्रमुख प्रावधानों की गहन और रोचक खोज के लिए तैयार किया गया है। विवि के कुलपति डॉ. सी राजकुमार ने बताया कि संग्रहालय का उद्देश्य संविधान को सुलभ और प्रासंगिक बनाना है। इसमें भी यह दिखाते हुए कि इसके मूल्य और आदर्शों ने राष्ट्र को कैसे आकार दिया है। यहां आगंतुक 360 डिग्री के दृश्य अनुभव के माध्यम से स्वतंत्रता से पहले भारत की झलकियों और ध्वनियों में डूब सकते हैं।



अत्याधुनिक तकनीक और मल्टीमीडिया के माध्यम से प्रदर्शनी संविधान के निर्माण की तरफ ले जाने वाली घटनाओं की कालक्रमिक गाथा प्रस्तुत करती है। जिंदल ग्लोबल विवि और आईआईटी मद्रास के सहयोग से एक अनोखे टूर गाइड रोबोट साम्विद के माध्यम से संग्रहालय में भारत को गणराज्य बनाने वाले ऐतिहासिक दस्तावेज को जीवंत किया गया है।

Haryana: Country's first Constitution Museum in Sonipat, showing glimpses of pre-independence India
संविधान संग्रहालय में रखी एकता के प्रतीक की कलाकृति। - फोटो : संवाद
मशहूर कलाकारों ने संग्रहालय की फोटो लिथोग्राफी की
संग्रहालय के केंद्र में भारतीय संविधान की 1000 फोटो लिथोग्राफिक प्रतियों में से एक प्रदर्शित है। पांच वर्ष में निर्मित मूल संस्करण में संविधान निर्माताओं के हस्ताक्षर हैं। इस संस्करण की सुलेख कला प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने की थी। पाठ का चित्रण नंदलाल बोस और अन्य कलाकारों ने किया था। यह पांडुलिपि देहरादून में प्रकाशित हुई थी और सर्वे ऑफ इंडिया की तरफ से फोटो लिथोग्राफ की गई थी।
Haryana: Country's first Constitution Museum in Sonipat, showing glimpses of pre-independence India
संविधान संग्रहालय में रखी एकता के प्रतीक की कलाकृति। - फोटो : संवाद

संविधान सभा के करीब 300 सदस्यों की स्मृति में उनकी मूर्तियों के बस्ट संग्रहालय में लगाए गए हैं, जिससे उनके योगदान को पहचाना जा सके। गैलरी में भारत के संविधान के निर्माण में वैश्विक प्रेरणाओं और ऐतिहासिक ढांचों का भी अन्वेषण किया गया है। संग्रहालय विशेष रूप से संविधान सभा की महिला सदस्यों के योगदान को उजागर करता है। यहां प्रत्येक महिला सदस्य के जीवन और उनके योगदान को एनिमेशन के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

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Haryana: Country's first Constitution Museum in Sonipat, showing glimpses of pre-independence India
एआई तकनीक से निर्मित महात्मा गांधी व जवाहर लाल नेहरू के चित्र। - फोटो : संवाद

डॉ. बीआर आंबेडकर का होलोग्राम प्रदर्शन बेहतर
संग्रहालय में डॉ. बीआर आंबेडकर का होलोग्राम प्रदर्शन भी है। यह स्थापना उनके शब्दों और दृष्टिकोण को जीवंत बनाती है, जिससे आगंतुक उनकी विरासत का प्रत्यक्ष अनुभव कर सकते हैं। इस होलोग्राम में उनके भाषणों और लेखों पर आधारित उत्तर प्रस्तुत किए गए हैं।

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Haryana: Country's first Constitution Museum in Sonipat, showing glimpses of pre-independence India
एआई तकनीक से निर्मित बाबा साहेब आंबेडकर का चित्र। - फोटो : संवाद

कला संग्रह के मुख्य आकर्षण
राजेश पी. सुब्रमण्यम की मूर्ति 'वी द पीपल ऑफ इंडिया' 'विविधता में एकता' के सांविधानिक सिद्धांत को साकार करती है। राहुल गौतम की म्यूरल 'इकोज ऑफ लिबर्टी' सांविधानिक पांडु लिपियों के तत्वों को आधुनिक डिजाइन के साथ मिलाकर तैयार की गई है। हर्षा दुर्गड्डा की 'त्रिआड ऑफ यूनिटी' में एकता, न्याय और संप्रभुता के विषयों को जोड़ा गया है। निशांत एस. कुम्भाटिल की 'इंसाफ की देवी' भारतीय कानून में निष्पक्षता का प्रतीक, न्याय की देवी को दर्शाती है। प्रदीप बी. जोगदंड की 'कानून के समक्ष समानता' समानता और न्याय का प्रतीक है। देवल वर्मा की बड़ी 'चुनौतियों का नक्शा', दर्शकों को मूल्य और सुंदरता की अवधारणाओं पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करती है। केआर नरीमन की 'फ्रीडम', 'वी, द पीपल' के सांविधानिक मूल्यों को प्रदर्शित करती हैं।

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