बंगाल से किसान आंदोलन में शामिल होने आई युवती के साथ टीकरी बॉर्डर पर सामूहिक दुष्कर्म के मामले के बाद से हड़कंप मचा है। संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं को दो मई से मामले की जानकारी होने के बावजूद पुलिस को शिकायत नहीं देने की बात सामने आने से किसान मोर्चा के नेता भी घेरे में आ गए हैं। किसान आंदोलन पर इसका बड़ा असर पड़ता दिखाई दे रहा है। ऐसे में धरनास्थलों के मुख्य मंच से किसान नेता अब डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं।
टीकरी बॉर्डर केस: अब डैमेज कंट्रोल में जुटे किसान नेता, धरनास्थल पर लगे हर टेंट की होगी जांच
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किसान आंदोलन में जिस तरह से कई राज्यों के किसान व अन्य संगठनों के लोग शामिल हैं, उस तरह ही इस घटना से आंदोलन की साख पूरे देश में खराब हुई है। यह खुद संयुक्त किसान मोर्चा के नेता भी जानते हैं। यही कारण है कि कुंडली, टीकरी, गाजीपुर समेत अन्य जिन जगहों पर धरना चल रहा है, वहां पिछले दो दिन से युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मुद्दा छाया हुआ है।
आंदोलन में सैकड़ों टेंट लगे, काफी को किसान नेता भी नहीं जानते
कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के बॉर्डर पर धरनास्थलों पर सैकड़ों टेंट लगे हुए हैं, जिनमें से काफी ऐसे भी किसान हैं, जिनको खुद किसान नेता नहीं जानते हैं। अब इस घटना के बाद किसान नेता इसी तरह पल्ला झाड़ रहे हैं। उनका दावा है कि वह किसान सोशल आर्मी व उनके नेताओं को नहीं जानते हैं। उनका संयुक्त किसान मोर्चा से कोई मतलब नहीं है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि टेंट की जांच पहले ही होनी चाहिए। इसलिए कहा जा रहा है कि धरनास्थलों पर टेंट की जांच कराई जा सकती है।
जब यह मामला किसान मोर्चा के नेताओं की जानकारी में आया तो उसी समय साफ कहा गया था कि इसमें युवती के पिता रिपोर्ट करें और किसान मोर्चा उनका पूरा साथ देगा। यह भी साफ था कि अगर पिता रिपोर्ट नहीं कराएंगे तो किसान मोर्चा कराएगा। युवती के पिता ने निर्णय लेने में कुछ देरी की, लेकिन हम पूरी तरह से पीड़ित परिवार के साथ हैं और उनकी केस लड़ने में आर्थिक व कानूनी रूप हर मदद करेंगे। जहां तक टेंट लगाने वालों की जांच की बात है तो यह भीड़ ज्यादा होने के कारण मुमकिन नहीं था। अब यह मामला होने के बाद सब कुछ किया जाएगा। किसान आंदोलन पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, जिसके लिए सभी के सामने सच्चाई बताई जा रही है। -राकेश टिकैत, राष्ट्रीय प्रवक्ता भाकियू
किसान मोर्चा के नेताओं को 2 मई को इस बारे में बताया गया था। तुरंत बाद ही टीकरी बॉर्डर कमेटी ने बैठक करके टेंट उखड़वा दिए और उनका बहिष्कार किया था, जहां तक कानूनी कार्रवाई की बात थी तो वह युवती के पिता को करनी थी। उसके लिए किसान मोर्चा ने साथ रहने की बात कही थी। वह कह रहे थे कि किसान आंदोलन को नुकसान भी नहीं होना चाहिए और बेटी को न्याय भी मिले। इसलिए ही युवती के पिता ने निर्णय लेने में कुछ देरी की। - जोगिंदर सिंह उगराहां, सदस्य संयुक्त किसान मोर्चा