"मेरी रबर गुम हो गई थी। मैं उसे ढूंढ रहा था। इतनी सी बात पर रेनू मैडम को गुस्सा आ गया। उन्होंने मुझे पास बुलाया। पहले खुद पीटा और फिर ड्राइवर अंकल को बुला लिया। उनसे कहा कि इसे दूसरे कमरे में ले जाओ और उल्टा लटका दो। अंकल ने बहुत पीटा और हाथ पैर बांध दिए। मैं रो रहा था लेकिन अंकल को तरस नहीं आया।"
"मैंने अंकल से कहा, प्लीज और मत पीटना। अब कोई गलती नहीं करूंगा लेकिन वे रुके नहीं। बाद में मैडम ने कह दिया था कि अगर किसी को बताया तो अंजाम बहुत बुरा होगा। मुझे लगा कि मैडम फिर से उल्टा लटकवा देगी। इसी डर से चुप रहा।" यह आपबीती उस बच्चे की है, जिसे 13 अगस्त को उल्टा लटकाया गया था।
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child beat up at school
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बच्चे ने सोमवार को बाल कल्याण समिति के सामने बहुत धीमी आवाज में बताया कि उस दिन से उसे ठीक से नींद भी नहीं आ रही है। जब आंख लगती तो डरावने सपने आते हैं। कमरे में अकेले जाता है तो डर लगता है। वह इतना डर गया था कि पढ़ाई में मन ही नहीं लग रहा था।
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स्कूल में बच्चे को उल्टा लटकाकर पीटा
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जरा सी बात पर भी थप्पड़ मारती थी मैडम
समिति ने कुल चार बच्चों की काउंसिलिंग की है। सोमवार को जिला बाल संरक्षण अधिकारी निधि गुप्ता, जिला बाल कल्याण समिति की चेयरमैन पदमा रानी, सदस्य डॉ. मुकेश आर्य स्कूल में पहुंचे। जब टीम मौके पर पहुंची तो वहां पर ताला लगा हुआ था। इसके बाद टीम ने बच्चों के अभिभावकों से संपर्क किया। टीम ने चार बच्चों को काउंसिलिंग के लिए बुलाया। सबसे पहले जिस बच्चे को उल्टा लटकाया गया था उसकी काउंसिलिंग हुई।
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आरोपी प्रिंसिपल रेनू
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इसके बाद तीन और बच्चों की काउंसिलिंग हुई। इनमें एक बच्चे की उम्र मात्र तीन साल और एक की पांच साल है। बच्चों ने बताया कि मैडम जरा-जरा सी बात पर थप्पड़ मारती थी। अगर कोई किसी बच्चे से जोर से बोले और मैडम सुन ले तो समझो बच्चे की पिटाई होकर ही रहेगी।
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स्कूल के बाहर बच्चे और अभिभावकों से पूछताछ करते अधिकारी
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बाल कल्याण समिति की चेयरपर्सन पदमा रानी ने बताया कि राज्य बाल कल्याण आयोग ने प्रकरण की पूरी रिपोर्ट मांगी है। फोन पर घटना से अवगत करा दिया गया है। रिपोर्ट तैयार कर राज्य बाल कल्याण आयोग को भेजी जाएगी।