हरियाणा के कैथल के गांव ग्योंग निवासी 28 साल के बलविंद्र ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। दस साल पहले भारतीय सेना में भर्ती होकर दस साल से नासिक में ड्यूटी दे रहे बलविंद्र सिंह को ड्यूटी पर हार्ट अटैक आया। जिस कारण वे शहीद हो गए। 15वीं जाट रेजिमेंट की टुकड़ी उनके पार्थिव शरीर को लेकर गांव में पहुंचीं। जहां सेना के जवानों द्वारा बजाई गई मातमी धुन के बीच फायरिंग कर उन्हें सलामी दी। साथ ही सांसद नायब सैनी, विधायक लीला राम व अन्य गण्यमान्य लोगों ने अंतिम विदाई में उनकी शहादत को सलाम किया।
बलविंद्र ने दिया सर्वोच्च बलिदान: तिरंगे में लिपटा आया शहीद का पार्थिव शरीर, अंतिम विदाई में गूंजे जयकारे
शहादत की सूचना पहुंचने के बाद भारी संख्या में गांव सहित आस-पास के गांवों व शहर से लोगों की भीड़ बलविंद्र सिंह के घर के बाहर एकत्रित हो गई। युवाओं ने हाथों में तिरंगे लेकर एनएच-152 डी से आर्मी के काफिले की अगुवाई की।
उनके पार्थिव शरीर को उतार कर एक बार उनके घर के अंदर ले जाया गया। रेजिमेंट में आए सूबेदार वीरेंद्र सिंह ने तिरंगा उनके भाई को भेंट किया। आवश्यक रस्मों के बाद आर्मी के जवान उनके पार्थिव शरीर को कंधे पर लेकर श्मशान भूमि की ओर बढ़े तो भारी संख्या में गांव वासी व आस-पास के क्षेत्रों से आए हजारों लोग उनके पीछे चल पड़े।
बलविंद्र सिंह अमर रहे, जब तक सूरज चांद रहेगा, बलविंद्र का नाम रहेगा जैसे नारों के साथ उनके पार्थिव शरीर को लेकर श्मशान भूमि में पहुंचें। जहां सूबेदार वीरेंद्र सिंह, सांसद नायब सैनी, विधयाक लीला राम व एसडीएम संजय कुमार, पूर्व सैनिक समिति सदस्यों ने पुष्प चक्र भेंट कर शहीद बलविंद्र सिंह को नमन किया। इसके बाद लोगों ने पुष्प भेंट कर उन्हें नमन किया।
बेटे ने पुष्प अर्पित कर किया पिता को नमन
कई लोगों की आंखें उस समय नम हो गईं, जब उनके ढाई साल के बेटे जैनिश ने चाचा की गोद में से श्मशान भूमि में अपने पिता को पुष्प अर्पित कर नमन किया। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को चिता पर रखकर उनके भाई कुलविंद्र सिंह ने मुखाग्नि दी। साथ ही रेजिमेंट के जवानों ने मातमी धुन बजाई। साथ ही हवाई फायर कर बलविंद्र सिंह को सलामी दी।
रनिंग करके लौटे तो आया अटैक
सूबेदार वीरेंद्र सिंह ने बताया कि बलविंद्र सिंह नियमित रनिंग करके आए थे। जहां उन्हें हार्ट अटैक हो गया। हार्ट अटैक की वजह से अस्पताल ले गए। जहां अंतिम सांस ली। युवाओं से अपील है कि देश के लिए शहीद होता है, उसकी मौत नहीं, हर देशवासी के हृदय में आवास करता है। वह कभी भुलाया नहीं जाता। सूरज-चांद रहने तक उनका नाम रहता है। इसी प्रकार से बलविंद्र सिंह का नाम हमेशा अमर रहेगा।
शहीद जवान बलविंद्र सिंह के ताऊ बलबीर सिंह व चाचा वकील सिंह ने बताया कि उनके भाई रघुबीर के बेटे बलविंद्र दस साल पहले खेल कोटे से भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। वे दस साल से नासिक में तैनात थे। परिवार के पास सूचना आई थी कि वे शहीद हो गए हैं। बलविंद्र सिंह का छोटा भाई कुलविंद्र सिंह भी कबड्डी का खिलाड़ी है। उनकी एक बहन कुसुम है। साथ ही परिवार में माता संतोष देवी, पिता रघुबीर सिंह दलाल, पत्नी रिंपी सहित बेटा जैनिश ढाई साल का है।
सांसद नायब सैनी, विधायक लीला राम, एसडीएम संजय कुमार, जिला अध्यक्ष अशोक गुर्जर, तहसीलदार सुदेश मेहरा, पूर्व सैनिक सहित अन्य नेताओं ने कहा कि महान है बलविंद्र सिंह का परिवार, जिसने बलविंद्र जैसा वीर पैदा किया। जिसने देश के लिए शहादत दी। बलविंद्र सिंह हमेशा याद किए जाएंगे।