जम्मू के पंपोर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए कैप्टन पवन खटकड़ की शहादत को रस्म तेरहवीं पर हुए समागम में हर किसी ने सेल्यूट किया। कोई नेता-मंत्री नहीं पहुंचा।
शहीद कैप्टन पवन को 13 दिन में भूले नेता, पिता गर्वित
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शहीद कैप्टन पवन
- फोटो : अमर उजाला
कैप्टन पवन खटकड़ के पिता शिक्षाविद् राजबीर खटकड़ ने बताया कि जब पवन आईएमए देहरादून पहुंचा तो सेना के अधिकारियों ने उसके कमीज पर बैज लगाया। उस पर लिखा था मेरा बेटा देश को समर्पित। मैंने उसी दिन समझ लिया था कि मेरा बेटा अब मेरा नहीं रहा, बल्कि देश का हो गया है। उसे अपने बेटे पर गर्व है। एक बेटा होने के चलते उसे नुकसान तो हुआ है, लेकिन उसे इसके लिए दुख नहीं, क्योंकि उसका बेटा देश के काम आया है।
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कैप्टन पवन खटकड़ के पिता राजबीर खटकड़ ने कहा कि हमें तो सेना की वर्दी देखकर गर्व महसूस होता है, लेकिन जम्मू-कश्मीर के लोग सेना का साथ नहीं देते। जब भी कार्रवाई करने सेना के जवान आते हैं तो उन पर पथराव किया जाता है। एक बार स्थानीय लोगों ने सेना पर पथराव किया तो पवन को एक पत्थर मुंह पर लगा, उसके दांत तथा मुंह पर चोट आई थी। चोट लगने के बावजूद भी पवन ने आपरेशन में भाग लिया और आखिरी दम तक आतंकवादियों से लड़ता रहा।
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बेशक प्रधानमंत्री से लेकर भाजपा के तमाम नेता सीमा पर देश के लिए शहीद होने वाले वीर सैनिकों के लिए बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन शुक्रवार शहीद कैप्टन पवन कुमार की रस्म तेरहवीं में सरकार की तरफ से सिर्फ जिला प्रशासन ही शरीक हुआ। मुख्यमंत्री या कैबिनेट मंत्री के नहीं पहुंचने का मामला मंच से भी कुछ संस्थाओं ने उठाया। शहीद पवन कुमार को श्रद्धांजलि देने के लिए सरकार का किसी मंत्री का नहीं पहुंचना चर्चा का विषय बना रहा।
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श्रद्धांजलि समारोह में हर व्यक्ति ने कैप्टन की शहादत को सैल्यूट किया। उनके पैतृक गांव बधाना की पंचायत ने गांव की 50 एकड़ पंचायती जमीन को प्रस्ताव पारित करके उस पर कैप्टन पवन खटकड़ के नाम से सैनिक स्कूल बनाने की मांग की है। गांव की सरपंच अनिता ने ग्राम पंचायत में इसके लिए प्रस्ताव पारित किया और प्रदेश सरकार तथा केंद्रीय मंत्रियों से मिलकर जल्द सैनिक स्कूल की मंजूरी देकर वहां स्कूल बनाने की मांग करने की बात कही।