हरियाणा के अंबाला के गांव बलाना में एक ही परिवार के छह सदस्यों की एक साथ मौत ने लोगों को झंझोर कर रख दिया। परिवार में सबसे छोटी बेटी 5 वर्षीय आशू का शुक्रवार को जन्मदिन भी था। एक दिन पहले जो परिवार बच्ची के जन्मदिन को लेकर खुशी-खुशी गांवभर में सगे संबंधियों को न्यौता दे रहा था, सुबह करीब 7 बजे उस परिवार के सभी लोगों के शव देखकर लोग की आंखें नम हो गई। परिजन फूट-फूट कर रोने लगे।
पांच हत्या कर की आत्महत्या: बेटी के जन्मदिन का एक दिन पहले दिया था गांव में न्यौता, एक साथ जली छह चिताएं
एक ही परिवार के छह सदस्यों की एक साथ मौत ने लोगों को झंझोर कर रख दिया। परिवार में सबसे छोटी बेटी 5 वर्षीय आशू का शुक्रवार को जन्मदिन भी था।
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सुसाइड नोट के सबसे ऊपर बनाए थे छह लोगों के फंदे से लटकने वाले चित्र
गांव बलाना निवासी सुखविंद्र सिंह ने पहले ही परिवार के साथ-साथ खुद के खत्म करने का फैसला कर लिया था। इसका खुलासा सुसाइड मिलने से हुआ। सुसाइड नोट में अंतिम बातचीत के साथ-साथ ऊपर पैन से ही एक चित्र बनाया हुआ था। जिसमें छह लोग फंदे से लटके हुए बनाए थे। जो बेहद चौंकाने वाला था। जांच टीमों द्वारा सुसाइड नोट को जांच के लिए लैब में भेजा जाएगा, ताकि पता चल सके कि आखिर यह राइटिंग सुखविंद्र है कि नहीं। सुखविंद्र ने सुसाइड नोट के लिए एक डायरी का इस्तेमाल किया और दो पन्नों पर मौत के कारण के साथ-साथ अपनी जायदाद को भी बांट गया।
यह डॉक्टर थे पोस्टमार्टम पैनल में शामिल
- डॉ. निशांत हड्डी रोग विशेषज्ञ
- डॉ. अरूण शर्मा हड्डी रोग विशेषज्ञ
- डॉ. अल्पना महिला रोग शेषज्ञ
- डॉ. सुमित खुखरेजा फोरेंसिंक एक्सपर्ट
बेटी के जन्मदिन होने के कारण गुरुद्वारे में रखवाया था सुखमणि साहिब का पाठ
मृतक सुखविंद्र सिंह की बेटी के जन्मदिन वाले दिन ही पूरा परिवार खत्म हो गया। पड़ोसी दिलबाग व रिंकू ने बताया कि गुरुद्वारा साहिब में सुखमणि साहिब का पाठ भी रखवाया गया था। परिवार व संगे संबंधियों को सुखविंद्र व उसकी पत्नी रीना न्यौता दे रही थी। सुखविंद्र के भांजे करनदीप ने बताया कि सुबह के समय जन्मदिन की बधाई देने के लिए ही फोन किया था लेकिन किसी ने नहीं उठाया।
काफी देर प्रयास करने के बाद भी फोन नहीं उठा तो पड़ोसियों को फोन किया। उन्होंने जाकर देखा तो इस मामले का खुलासा हुआ। बिटिया के जन्मदिन को लेकर परिवार बेहद खुश था। बता दें कि आशु 5 साल की है तो दूसरी बहन जस्सी करीब 7 साल की है। गांव के ही स्थानीय लोगों ने बताया कि सुखविंद्र खुश मिजाज का व्यक्ति और उसने उन्हें भी सुखमणि साहिब के पाठ के लिए बुलाया हुआ था।
शादी से पहले था मोना, बाद में अमृतचखकर रखे थे केश
पड़ोसी सुखविंद्र सिंह ने बताया कि सुखविंद्र सिंह पहले मोना था। करीब 9 साल पहले हुई शादी के बाद ही अमृत चखा था और पग डालने लगा था। पूजा पाठ भी नियमित तौर पर किया करता था। उधर, मौत की खबर लगते ही पत्नी रीना के मायके पक्ष वाले भी मौके पर पहुंचे और वो भी इस वारदात के बारे में सोचकर फूट-फूट कर रो रहे थे। उन्होंने कहा कि कभी उनके बीच लड़ाई झगड़े की बात नहीं सुनी थी। वह अपने परिवार के साथ बहुत खुश था। सुखविंद्र की पत्नी रीना कैथल के गांव भागलपुर की रहने वाली थी।
दादा जगीर सिंह से सुखविंद्र के पिता को मिली थी नंबरदारी
गांव बलाना में नंबरदार परिवार का अच्छा रसूख है। दादा जगीर सिंह नंबरदार थे, उसके बाद यह जिम्मा सुखविंद्र सिंह के पिता संगत राम को मिला था। संगत राम कुल पांच भाई है। जिसमें से तीन भाई बलाना में ही रहते हैं और एक बड़ा भाई पिंजौर में रहता है। नंबरदार के साथ संगत राम जूतों की कंपनी में बतौर ठेकेदार थे और पहले यह कंपनी बलाना गांव में ही थी उसे बाद दुर्गा नगर नसीरपुर के पास चली गई थी। पिता कंपनी में भी जाया करते थे।